बाजार के स्टीरियोटाइप के विपरीत, नए आंकड़े बताते हैं कि भारत की Gen Z अब लाइफस्टाइल के बजाय अपनी बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है। अपनी कमाई का **70%** से ज्यादा हिस्सा ये युवा बिलों और राशन जैसी जरूरी चीजों पर खर्च कर रहे हैं।
आंकड़ों की हकीकत
आमतौर पर माना जाता है कि Gen Z सिर्फ मौज-मस्ती और लग्जरी पर खर्च करती है, लेकिन UPI ट्रांजेक्शन के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। सैलरी पाने वाले युवाओं के कुल खर्च का 20.1% हिस्सा बिलों और सब्सक्रिप्शन में जा रहा है, जबकि 15.7% खर्च ग्रोसरी पर हो रहा है। वहीं, ट्रैवल जैसे दिखावटी खर्चों पर मात्र 5% राशि खर्च की जा रही है।
जागरूकता बनाम निवेश का अंतर
SEBI के आंकड़ों के मुताबिक, 66% Gen Z को कैपिटल मार्केट प्रोडक्ट्स की अच्छी समझ है, जो कि मिलेनियल्स और Gen X से कहीं ज्यादा है। हालांकि, हकीकत में केवल 9% युवा ही फिलहाल निवेश कर रहे हैं। बड़ी बात यह है कि भविष्य में निवेश करने वालों में 56% हिस्सेदारी इसी पीढ़ी की है।
कर्ज और रिस्क का जोखिम
विशेषज्ञों की चिंता इस बात को लेकर है कि युवा तेजी से 'Buy Now, Pay Later' (BNPL) जैसे क्रेडिट जाल में फंस रहे हैं। कई युवा बिना इमरजेंसी फंड बनाए या इंश्योरेंस लिए हाई-रिस्क वाली ट्रेडिंग की ओर बढ़ रहे हैं। वित्तीय जानकारों की सलाह है कि कर्ज आपकी टेक-होम सैलरी के 30% से ऊपर नहीं होना चाहिए और 40% इसकी अधिकतम सीमा है। निवेश शुरू करने से पहले इमरजेंसी कॉर्पस और बीमा को प्राथमिकता देना ही समझदारी है।
