फॉर्म 67 की डेडलाइन: **31 मार्च 2026** तक फाइल करें, पाएं विदेशी टैक्स क्रेडिट का लाभ!

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AuthorAditya Rao|Published at:
फॉर्म 67 की डेडलाइन: **31 मार्च 2026** तक फाइल करें, पाएं विदेशी टैक्स क्रेडिट का लाभ!
Overview

भारत सरकार ने विदेशी कमाई पर टैक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए **फॉर्म 67** फाइल करने की अंतिम तिथि **31 मार्च 2026** तय की है। नियमों का पालन न करने पर भारी पेनल्टी और मुकदमेबाजी का सामना करना पड़ सकता है।

फॉर्म 67 की डेडलाइन का महत्व

भारत में रहने वाले (Indian residents) ऐसे लोग जिनकी विदेशी आय है, उन्हें 31 मार्च 2026 तक फॉर्म 67 जमा करना अनिवार्य है। इस फॉर्म के ज़रिए आप विदेश में चुकाए गए टैक्स पर क्रेडिट (Foreign Tax Credit - FTC) का दावा कर सकते हैं, जिससे आपकी विदेशी कमाई पर दोबारा टैक्स लगने से बचा जा सके। अगर आप समय पर यह फॉर्म फाइल नहीं करते हैं, तो टैक्स अधिकारी आपका FTC क्लेम नामंज़ूर कर सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप आपको ज़्यादा टैक्स, ब्याज और पेनल्टी देनी पड़ सकती है।

भारत में फॉरेन टैक्स क्रेडिट कैसे काम करता है?

भारत में फॉरेन टैक्स क्रेडिट पाने के मुख्य दो तरीके हैं। पहला, डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस एग्रीमेंट्स (DTAAs), जो 94 से ज़्यादा देशों के साथ लागू हैं। इनके ज़रिए टैक्स से दोहरे बचाव का ढांचा मिलता है, जिसके लिए अक्सर टैक्स रेसिडेंसी सर्टिफिकेट (TRC) और फॉर्म 10F जैसे दस्तावेजों की ज़रूरत होती है। दूसरे तरीके में, उन देशों के लिए जहां संधि नहीं है, सेक्शन 91 के तहत एकतरफा राहत (unilateral relief) मिलती है। इससे निवासी उस आय पर भारतीय टैक्स दर तक विदेशी टैक्स का क्रेडिट ले सकते हैं। आम गलतियों में फॉर्म 67 और आपके इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) के बीच विसंगतियां, गलत करेंसी एक्सचेंज रेट का उपयोग, या VAT जैसे गैर-आय टैक्स का क्रेडिट लेना शामिल है। यह ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है कि गैर-निवासियों (NR) और सामान्य रूप से निवासी नहीं (RNOR) माने जाने वाले लोगों के लिए टैक्स नियम अलग होते हैं, जो आम तौर पर केवल भारतीय आय पर ही टैक्स देते हैं।

कंप्लायंस की चुनौतियां और कानूनी जोखिम

हालांकि कुछ इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) के फैसलों से पता चला है कि फॉर्म 67 की छोटी-मोटी देरी से फाइलिंग FTC क्लेम को सीधे ब्लॉक नहीं करनी चाहिए, फिर भी टैक्स अधिकारी इसे नामंज़ूर कर सकते हैं, जिससे अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और पेनल्टी लग सकती है। करदाताओं को विदेशी टैक्स सर्टिफिकेट और भुगतान के सबूत जैसे विस्तृत दस्तावेज जमा करने होंगे। विभिन्न देशों में अलग-अलग टैक्स ईयर साइकिल होने के कारण यह एक चुनौतीपूर्ण काम हो सकता है। टैक्स संबंधी विवाद समय लेने वाले और महंगे हो सकते हैं। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला नया इनकम-टैक्स एक्ट, 2025, इस अनिश्चितता को और बढ़ाता है। इसमें नए फॉर्म आ सकते हैं, जैसे कि ₹1 लाख से अधिक के दावों के लिए फॉर्म 67 की जगह एक संभावित फॉर्म 44, जिसके लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट से सर्टिफिकेशन की आवश्यकता हो सकती है।

भारत के नए टैक्स एक्ट की तैयारी

भारत वैश्विक मानकों के अनुरूप अपने टैक्स सिस्टम को नए इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के साथ अपडेट कर रहा है। सीमा पार कमाई करने वालों को नए नियमों और रिपोर्टिंग आवश्यकताओं के बारे में सूचित रहना चाहिए। भले ही अदालतें छोटी फाइलिंग त्रुटियों के लिए कुछ नरमी दिखाती हैं, सटीक और समय पर अनुपालन (compliance) टैक्स समस्याओं से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। जबकि भारत दोहरे कराधान को कम करके विदेशी प्रतिभा को प्रोत्साहित करना चाहता है, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नए टैक्स नियम कितने स्पष्ट और पालन करने में आसान होते हैं।

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