Budget 2026: टैक्सपेयर्स के लिए 'नो रिलीफ' का झटका, जानिए क्या रहा जस का तस

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AuthorMehul Desai|Published at:
Budget 2026: टैक्सपेयर्स के लिए 'नो रिलीफ' का झटका, जानिए क्या रहा जस का तस
Overview

यूनियन बजट 2026 में सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब और रेट्स को लेकर 'जैसे थे' वाले फॉर्मूले पर चलने का फैसला किया है। बजट में टैक्सपेयर्स को किसी नई राहत का ऐलान नहीं किया गया है, जिससे पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था के बीच चुनाव का सिलसिला जारी रहेगा।

टैक्सपेयर्स के लिए 'स्थिरता' या 'ठहराव'?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2026 पेश करते हुए साफ कर दिया है कि इनकम टैक्स के मौजूदा स्लैब और रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। सरकार का जोर वित्तीय स्थिरता पर है, जिसने टैक्सपेयर्स को राहत देने की बजाय मौजूदा व्यवस्था को ही जारी रखने का फैसला लिया है। ऐसे में, टैक्सपेयर्स को पहले की तरह ही पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Regime) जिसमें डिडक्शन मिलते हैं, और नई टैक्स व्यवस्था (New Regime) जिसमें कम रेट्स हैं, में से किसी एक को चुनना होगा।

नई टैक्स व्यवस्था: क्या है खास?

नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत ₹4 लाख तक की आय पर फिलहाल कोई टैक्स नहीं लगता है। ₹24 लाख से ऊपर की आय पर 5% से लेकर 30% तक की दरें लागू होंगी। खास बात यह है कि ₹12 लाख तक की सालाना कमाई करने वाले रेजिडेंट इंडिविजुअल्स को पूरा टैक्स रिबेट (Tax Rebate) मिलेगा, यानी उनका टैक्स शून्य होगा। वहीं, नई व्यवस्था में ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) के कारण सेलरीड क्लास के लिए यह सीमा ₹12.75 लाख तक बढ़ जाती है, जो मिडिल क्लास इनकम ग्रुप के लिए काफी फायदेमंद है, बशर्ते वे बहुत ज्यादा डिडक्शंस का फायदा न उठाते हों।

पुरानी टैक्स व्यवस्था की अपील?

वहीं, पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में ₹2.5 लाख तक की आय पर छूट है, जिसके बाद 5%, 20% और 30% की टैक्स स्लैब रेट्स लागू होती हैं। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए आज भी अहम है जो हाउस रेंट अलाउंस (HRA), लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA), सेक्शन 80C के तहत निवेश, मेडिकल इंश्योरेंस (80D), एनपीएस (NPS) या होम लोन के इंटरेस्ट जैसी कई तरह की डिडक्शंस और एग्जम्प्शन का फायदा उठा सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ₹12 लाख तक की इनकम के लिए नई व्यवस्था बेहतर है, लेकिन ₹24 लाख से ज्यादा कमाने वालों के लिए यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उनकी कुल डिडक्शंस ₹8 लाख से ज्यादा हैं या नहीं।

प्रोसीजरल बदलाव और कंप्लायंस में आसानी

भले ही टैक्स स्ट्रक्चर में कोई बदलाव न हुआ हो, लेकिन बजट में टैक्सपेयर्स की कंप्लायंस (Compliance) को आसान बनाने के लिए कुछ अहम प्रोसीजरल बदलाव किए गए हैं। रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न (Revised ITR) फाइल करने की डेडलाइन को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है, जिसके लिए एक मामूली फीस देनी होगी। इसके अलावा, ITR-1 और ITR-2 फाइल करने की समय सीमा 31 जुलाई तक और नॉन-ऑडिट बिजनेस केस व ट्रस्ट के लिए 31 अगस्त तक रखी गई है। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले इंटरेस्ट पर पूरा टैक्स एग्जम्प्शन और फॉरेन टूर पैकेज पर TCS (Tax Collected at Source) में कमी जैसे ऐलान भी किए गए हैं। 1 अप्रैल, 2026 से न्यू इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होने की उम्मीद है, जिससे टैक्स सिस्टम को और सरल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।

एक्सपर्ट्स की राय और आगे का रास्ता

टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल टैक्सपेयर्स को अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) पर ही ध्यान देना होगा ताकि वे मौजूदा दोहरी टैक्स व्यवस्था का पूरा फायदा उठा सकें। सरकार का यह कदम बाजार में स्थिरता लाने और निवेशकों को भरोसा देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, आने वाले समय में न्यू इनकम टैक्स एक्ट 2025 के लागू होने से टैक्स नियमों में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।

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