भारत में क्यों फेल हो रहा 4% रूल?
पश्चिमी देशों में दशकों से इस्तेमाल किया जाने वाला 4% विथड्रॉअल रूल भारत की आर्थिक हकीकत से मेल नहीं खाता। यह रूल अमेरिकी मार्केट डेटा पर आधारित है और 30 साल की अवधि के लिए टेस्ट किया गया है, लेकिन यह भारत की खास आर्थिक परिस्थितियों, जैसे कम नेट इन्वेस्टमेंट रिटर्न और कड़े टैक्स सिस्टम को नजरअंदाज करता है।
कम रिटर्न और ज्यादा टैक्स का असर
भारतीय कैपिटल मार्केट (Capital Markets) में ग्रोथ की रफ्तार धीमी हुई है। जहां पहले इक्विटी (Equity) से शानदार रिटर्न मिलता था, वहीं अब औसत ग्रोथ रेट कम हो गई है। डेट मार्केट (Debt Market) में भी यही हाल है, जहां रिटर्न 11% से गिरकर हाल ही में लगभग 7.6% रह गया है। हालात और भी खराब हो गए हैं क्योंकि टैक्स कानून बदल गए हैं। पहले इक्विटी से होने वाले मुनाफे पर टैक्स नहीं लगता था और डेट इन्वेस्टमेंट पर इंडेक्सेशन बेनिफिट (Indexation Benefits) मिलते थे। अब कैपिटल गेन्स (Capital Gains) पर टैक्स लगता है, और डेट इन्वेस्टमेंट पर स्लैब-रेट टैक्सेशन (Slab-rate Taxation) लागू होता है, जिससे नेट रिटर्न काफी कम हो गया है। पहले 50:50 इक्विटी-डेट पोर्टफोलियो से जो 15.5% तक का प्री-टैक्स रिटर्न मिलता था, वह अब पोस्ट-टैक्स करीब 8.5% रह गया है। ऐसे में, अगले 30-50 साल तक लगातार डबल-डिजिट रिटर्न की उम्मीद करना, जैसा कि 4% रूल मानता है, अवास्तविक है। कम रिटर्न का सीधा मतलब है कि बचत को बनाए रखने के लिए बहुत कम विथड्रॉअल रेट की जरूरत होगी।
भारत के लिए चाहिए कस्टमाइज्ड प्लान
4% रूल के जनक विलियम बेंगा (William Bengen) ने खुद माना था कि यह रूल सार्वभौमिक नहीं है, और टैक्स स्टेटस और एसेट एलोकेशन (Asset Allocation) जैसे फैक्टर इसे महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं। भारत में ये फैक्टर और भी अहम हो जाते हैं। ज्यादातर भारतीय रिटायरमेंट के बाद कंजर्वेटिव एसेट मिक्स (Conservative Asset Mix) पसंद करते हैं, जिसमें इक्विटी का हिस्सा 50% से भी कम होता है, जिससे ग्रोथ की संभावना सीमित हो जाती है। इसके अलावा, इनकम और कैपिटल गेन्स दोनों पर टैक्स को ध्यान में रखते हुए, और सीमित सोशल सिक्योरिटी या पेंशन सिस्टम को देखते हुए, रिटायर होने वालों को बड़े सेविंग पूल की जरूरत है या उन्हें काफी कम राशि निकालनी होगी।
एक अधिक प्रभावी रणनीति यह है कि रिटायरमेंट सेविंग लक्ष्यों को रियलस्टिक पोस्ट-टैक्स रिटर्न, शायद 8-9% के आसपास, पर आधारित किया जाए। विथड्रॉअल प्लान में इन्फ्लेशन (Inflation) और हेल्थकेयर खर्चों के लिए बफर (Buffer) को अच्छी तरह शामिल किया जाना चाहिए। कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए, वे महंगाई के बराबर या उससे कम रिटर्न का प्लान बना सकते हैं। ज्यादा एग्रेसिव निवेशकों के लिए, सख्त जोखिम प्रबंधन के साथ, वे महंगाई से थोड़ा ऊपर नॉमिनल रिटर्न का लक्ष्य रख सकते हैं। मार्केट में बदलावों के साथ एडजस्ट करने और प्लान को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए नियमित समीक्षा, शायद हर छह महीने में, जरूरी है, बजाय इसके कि किसी एक निश्चित प्रतिशत पर टिके रहें।