प्रिजम्पटिव टैक्स का बदला नियम
इनकम टैक्स एक्ट 2025 ने पेशेवरों के लिए प्रिजम्पटिव टैक्स (Presumptive Tax) के नियमों में बड़ा फेरबदल किया है। यह वो सिस्टम था जो कई सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए टैक्स फाइलिंग को आसान बनाता था और प्रशासनिक काम को कम करता था।
नया नियम: ज़्यादा मुनाफा तो ज़्यादा टैक्स
पहले, इनकम टैक्स के पुराने एक्ट (जैसे सेक्शन 44ADA) के तहत, पेशेवर अपनी कुल आय (Gross Receipts) का केवल 50% हिस्सा ही टैक्सेबल इनकम के तौर पर घोषित कर सकते थे। इससे उन्हें विस्तृत रिकॉर्ड रखने या खर्चों का हिसाब-किताब रखने से राहत मिलती थी। लेकिन, अब नए एक्ट के सेक्शन 58 की नई व्याख्या के अनुसार, यदि पेशेवर का वास्तविक मुनाफा कुल आय के 50% से ज़्यादा है, तो उसे उस उच्च वास्तविक मुनाफे को ही घोषित करना होगा।
उदाहरण के लिए, अगर किसी पेशेवर की कुल आय ₹24 लाख है और उसका वास्तविक मुनाफा ₹15 लाख है, तो उसे अब ₹15 लाख पर टैक्स देना होगा, जबकि पहले वह केवल ₹12 लाख (₹24 लाख का 50%) घोषित करता था। इस बदलाव से टैक्स में ₹1,09,200 तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे इस स्कीम के फायदे कम हो जाएंगे।
सरलता का अंत?
प्रिजम्पटिव टैक्स का मुख्य उद्देश्य छोटे पेशेवरों और व्यवसायों के लिए टैक्स अनुपालन (Tax Compliance) को सरल बनाना था। उन्हें कमाई के एक निश्चित प्रतिशत पर टैक्स चुकाने की अनुमति थी, जिससे प्रशासनिक लागतें कम होती थीं।
सेक्शन 44AA और 44ADA जैसे नियम इसे न्यूनतम 50% पर रखते थे। अब, सेक्शन 58 के अपडेट के तहत, टैक्सेबल राशि या तो वास्तविक मुनाफा होगी या कुल आय का 50%, जो भी ज़्यादा हो। यह बदलाव उन लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है जिनके मुनाफे का मार्जिन 50% से ज़्यादा है। इससे उन्हें पारंपरिक अकाउंटिंग की तरह विस्तृत रिकॉर्ड रखने की ज़रूरत पड़ सकती है।
आगे क्या?
इस बदलाव के बाद, पेशेवरों को यह फिर से जांचना होगा कि क्या प्रिजम्पटिव स्कीम उनके लिए अभी भी फायदेमंद है। जिन पेशेवरों का प्रॉफिट मार्जिन लगातार 50% से ऊपर रहता है, उन्हें अब ज़्यादा टैक्स चुकाना पड़ सकता है। ऐसे में, उन्हें ज़्यादा विस्तृत रिकॉर्ड रखने या पारंपरिक अकाउंटिंग में वापस जाने पर विचार करना पड़ सकता है। टैक्स सलाहकार (Tax Advisors) अब इन नए नियमों को समझने और सबसे अच्छी टैक्स स्ट्रैटेजी बनाने में मदद के लिए अधिक मांग में रहेंगे।