DIN: असली नोटिस की पहचान का डिजिटल तरीका
विभाग ने 1 अक्टूबर, 2019 से सभी आधिकारिक संचार के लिए डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (DIN) को अनिवार्य कर दिया है। यह कंप्यूटर-जनित नंबर एक डिजिटल फिंगरप्रिंट की तरह काम करता है। टैक्सपेयर्स अब www.incometax.gov.in जैसे आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपने नोटिसों और आदेशों को सत्यापित (authenticate) कर सकते हैं। पोर्टल पर DIN या PAN नंबर डालकर किसी भी नोटिस की प्रामाणिकता जांची जा सकती है। बिना वैध DIN वाले संचार को नज़रअंदाज़ करना चाहिए, इससे टैक्सपेयर्स की पहचान की चोरी (impersonation) से सुरक्षा होती है।
ई-फाइलिंग पोर्टल में सुधार और टैक्सपेयर्स को मदद
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स के लिए एक सुरक्षित और सुगम अनुभव सुनिश्चित करने हेतु अपने डिजिटल सिस्टम को लगातार बेहतर बना रहा है। ई-फाइलिंग पोर्टल अब नए Income Tax Act, 2025 के अनुसार पुराने और नए दोनों कानूनों के तहत संयुक्त भुगतान (combined payments) और फॉर्म जमा करने में मदद कर रहा है। जैसे e-Verification Scheme (2021) और ई-कैंपेन, टैक्सपेयर्स को AIS जैसे स्टेटमेंट में मौजूद डेटा के साथ अपनी रिपोर्ट की गई आय का मिलान करने में सहायता करते हैं।
स्कैम और धोखाधड़ी पर लगाम
विभाग फ़िशिंग (phishing) के ख़िलाफ़ चेतावनी देता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आधिकारिक ईमेल हमेशा @incometax.gov.in डोमेन से आएंगे और कभी भी ईमेल या SMS के ज़रिए पासवर्ड या OTP नहीं मांगेंगे। किसी भी संदिग्ध संचार की सूचना webmanager@incometax.gov.in पर रिपोर्ट की जानी चाहिए। आजकल, AI जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करने वाले हाई-टेक टैक्स स्कैम, टैक्सपेयर्स और वित्तीय प्रणाली के लिए एक बड़ा ख़तरा बन गए हैं। भारत में साइबर फ्रॉड के मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है, जिनमें वित्तीय घोटाले (financial scams) और सोशल इंजीनियरिंग (social engineering) शामिल हैं। धोखेबाज़ नकली रिफंड ईमेल, फोन पर पहचान बदलकर (phone impersonation) और भ्रामक लिंक्स (misleading links) का इस्तेमाल करके व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा चुराते हैं, जिससे पहचान की चोरी और वित्तीय नुकसान होता है। नकली टैक्स रिफंड संदेश आम हैं। वित्तीय नुकसान के अलावा, झूठे डिडक्शन (false deductions) क्लेम करने जैसे धोखाधड़ी वाले कार्यों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिसमें Income Tax Act की Section 270A और Section 276C के तहत जेल की सज़ा भी शामिल है। इन घोटालों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, लगातार सतर्क रहने और केवल आधिकारिक संचार माध्यमों का ही उपयोग करने की आवश्यकता है।