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Indian Stocks: Nifty **11%** लुढ़का, भू-राजनीतिक तनाव से घबराए निवेशक Bonds की ओर भागे

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Stocks: Nifty **11%** लुढ़का, भू-राजनीतिक तनाव से घबराए निवेशक Bonds की ओर भागे
Overview

मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भारतीय शेयर बाजार को बड़ा झटका दिया है। मार्च 2026 में, **Nifty 50** इंडेक्स **11.36%** की भारी गिरावट के साथ बंद हुआ, जो मार्च 2020 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट रही। इस उतार-चढ़ाव के बीच, निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले फिक्स्ड-इनकम साधनों की ओर भाग रहे हैं, जहां सरकारी योजनाओं और कॉर्पोरेट डेट में **6-8%** तक का यील्ड (Yield) मिल रहा है, लेकिन इनमें अलग-अलग जोखिम और रिटर्न प्रोफाइल को समझना ज़रूरी है।

भू-राजनीतिक डर से शेयर बाजार में हाहाकार

मार्च 2026, भारतीय शेयर बाजारों के लिए एक बड़ा गिरावट का महीना साबित हुआ। Nifty 50 इंडेक्स में 11.36% का भारी सेंध लगी, जो मार्च 2020 के बाद सबसे खराब मासिक प्रदर्शन था। इस भारी बिकवाली (Sell-off) की जड़ें मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव में थीं। हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सप्लाई चेन में आई बाधाओं और कच्चे तेल की कीमतों के $100 प्रति बैरल के पार जाने (ब्रेंट क्रूड $118 तक पहुंचा) ने भारत जैसे देश में लगातार महंगाई और आर्थिक मंदी की आशंकाओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का करीब 85% तेल आयात करता है।

बॉन्ड (Bond) में दिख रही सुरक्षा, मिल रहा 6-8% तक यील्ड

शेयर बाजार में इस हाहाकार के बीच, निवेशकों ने फिक्स्ड-इनकम साधनों का रुख किया है। ये ऐसे निवेश हैं जो संभावित रूप से स्थिर रिटर्न (Return) दे सकते हैं, हालांकि इनमें जोखिम और मुनाफे का मिश्रण होता है। उदाहरण के तौर पर, सरकारी योजनाओं जैसे नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) 5 साल के लिए 7.70% का ब्याज दे रहा है, वहीं पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) 15 साल की अवधि पर 7.10% का यील्ड (Yield) दे रहा है, और दोनों पर टैक्स में छूट भी मिलती है। RBI फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड 7 साल के लिए 8.05% तक का रिटर्न दे रहे हैं, जो NSC रेट से जुड़ा है। गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (G-Secs) वर्तमान में 10 साल की मैच्योरिटी पर 7.11% के आसपास यील्ड दे रही हैं। कॉर्पोरेट बॉन्ड (Corporate Bonds) में AAA-रेटेड वाले 7.5% से 8.5% तक का सालाना रिटर्न दे सकते हैं, पर इनमें क्रेडिट रिस्क (Credit Risk) भी होता है। हालांकि, ये यील्ड एक जैसे लग सकते हैं, पर इनकी सुरक्षा, मैच्योरिटी और क्रेडिट क्वालिटी में काफी अंतर है, इसलिए निवेशकों को Thorough Research करना ज़रूरी है।

बढ़ते आर्थिक जोखिम: महंगाई, रुपया और ग्रोथ पर असर

इस भू-राजनीतिक अस्थिरता से आर्थिक जोखिम बढ़ गए हैं। अगर यह संघर्ष लंबा खिंचा, तो भारत में 'स्टैगफ्लेशन' (Stagflation) यानी ऊंची महंगाई और धीमी ग्रोथ का माहौल बन सकता है। Bernstein की चेतावनी के अनुसार, अगर यह तनाव 2026 तक जारी रहा, तो भारत की जीडीपी ग्रोथ 2-3% तक गिर सकती है। तेल आयात महंगा होने से करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) बढ़ रहा है, जिससे भारतीय रुपया 94 प्रति US डॉलर के पार गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस गिरावट से आयात की लागत और बढ़ेगी और RBI के पास महंगाई को कंट्रोल करने और ग्रोथ को सपोर्ट करने के विकल्प सीमित हो जाएंगे। निफ्टी फिलहाल करीब 20x के ट्रे़लिंग P/E पर ट्रेड कर रहा है, जो कि शायद बढ़ती महंगाई और बढ़ते करंट अकाउंट डेफिसिट जैसी चुनौतियों को नज़रअंदाज़ कर रहा है।

RBI दरें स्थिर, आगे भी रहेगी अस्थिरता?

विश्लेषकों को उम्मीद है कि मध्य-पूर्व के हालात और कच्चे तेल की कीमतों पर निवेशकों की नज़र बनी रहेगी, जिससे बाजार में अस्थिरता (Volatility) जारी रह सकती है। Reserve Bank of India (RBI) से अप्रैल 2026 की अपनी मीटिंग में पॉलिसी रेट को 5.25% पर स्थिर रखने की उम्मीद है, क्योंकि यह बढ़ती महंगाई और धीमी ग्रोथ के जोखिमों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, भारत के बाजारों ने ऐतिहासिक रूप से भू-राजनीतिक झटकों से वापसी की है, लेकिन मौजूदा ऊंची वैल्यूएशन (Valuation), सप्लाई में रुकावटें और कमजोर रुपया इसे पिछली मंदी से ज़्यादा जटिल बना रहे हैं। फिक्स्ड इनकम में सुरक्षा की ओर यह झुकाव जारी रह सकता है, पर निवेशकों को अपने पैसे बचाने और अच्छे रिटर्न कमाने के लिए इस एसेट क्लास के विभिन्न जोखिमों और रिटर्न प्रोफाइल का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना होगा।

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