Global Fintech Fest 2026 में इंडस्ट्री दिग्गजों और रेगुलेटर्स ने एक बड़ा बदलाव लाने का संकेत दिया है। अब भारतीय फिनटेक कंपनियां केवल डिजिटल पहुंच बढ़ाने के बजाय ग्राहकों को उनके फाइनेंशियल लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करने पर जोर देंगी।
भारत का फिनटेक इकोसिस्टम एक नई परिपक्वता (Maturity) के दौर में प्रवेश कर रहा है। मुंबई में 8 से 11 सितंबर तक आयोजित 7वें Global Fintech Fest (GFF) 2026 में रेगुलेटर्स और इंडस्ट्री लीडर्स ने एक स्ट्रैटेजिक बदलाव की रूपरेखा तैयार की है। अब फिनटेक कंपनियों का लक्ष्य सिर्फ डिजिटल एक्सेस देना नहीं, बल्कि ग्राहकों की असली फाइनेंशियल वेल्थ को बढ़ाना है।
वॉल्यूम से वैल्यू की ओर
भारत ने UPI के जरिए 14 अरब मासिक ट्रांजेक्शन का आंकड़ा पार कर लिया है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब सिर्फ AUM या SIP की संख्या देखना काफी नहीं है। असली कामयाबी इस बात में है कि प्लेटफॉर्म ग्राहकों को कैश फ्लो मैनेजमेंट और कर्ज कम करने में कितनी मदद कर रहे हैं। अलग-अलग इंश्योरेंस और लोन प्रोडक्ट्स को जोड़ने के बजाय, अब एक 'होलिस्टिक अप्रोच' अपनाने का दबाव बढ़ रहा है।
रेगुलेशन और डेटा की जिम्मेदारी
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ कहा है कि फिनटेक कंपनियों को कस्टमर डेटा को सिर्फ 'बिजनेस एसेट' नहीं, बल्कि एक 'फिड्यूशरी जिम्मेदारी' मानना होगा। साथ ही, United Fintech Forum को SRO (Self-Regulatory Organization) के रूप में मंजूरी मिलना इस बात का संकेत है कि अब डेटा सेफ्टी और गवर्नेंस पर कोई समझौता नहीं होगा।
AI और सलाह की चुनौतियां
AI के जरिए पर्सनलाइज्ड फाइनेंशियल एडवाइस देना तो आसान है, लेकिन डेटा का बिखराव एक बड़ी समस्या बनी हुई है। बेहतर डेटा पोर्टेबिलिटी और इंटरऑपरेबिलिटी के बिना निवेशकों का एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर स्विच करना मुश्किल है। भविष्य में वही फिनटेक कंपनियां टिकेंगी जो केवल हाई ट्रांजेक्शन वॉल्यूम के पीछे भागने के बजाय क्वालिटी-ड्रिवन एडवाइस और सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी पर ध्यान देंगी।
