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भारत सरकार का बड़ा फैसला: विदेश पैसे भेजना अब 2% सस्ता! यात्रा, पढ़ाई, मेडिकल पर बड़ी राहत

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AuthorNeha Patil|Published at:
भारत सरकार का बड़ा फैसला: विदेश पैसे भेजना अब 2% सस्ता! यात्रा, पढ़ाई, मेडिकल पर बड़ी राहत
Overview

1 अप्रैल, 2026 से, भारत सरकार विदेश पैसे भेजने वालों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। Tax Collected at Source (TCS) की दर को घटाकर फ्लैट **2%** कर दिया गया है। यह बदलाव खासकर अंतरराष्ट्रीय यात्रा, शिक्षा और मेडिकल जरूरतों के लिए पैसे भेजने वाले व्यक्तियों के लिए बहुत फायदेमंद होगा, जिससे उनके शुरुआती खर्चों में भारी कमी आएगी।

अब विदेश पैसे भेजना होगा और भी आसान और सस्ता!

भारत सरकार के नए नियमों के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 से विदेश रेमिटेंस (Remittance) पर लगने वाले Tax Collected at Source (TCS) में बड़ी कटौती की गई है। पहले जहां कुछ खास खर्चों, जैसे टूर पैकेज या शिक्षा/मेडिकल के लिए, 5% से लेकर 20% तक TCS लग सकता था, वहीं अब इन सभी के लिए एकसमान 2% की दर लागू होगी। उदाहरण के लिए, अगर आप विदेश में पढ़ाई के लिए 30 लाख रुपये भेजते थे, तो पहले 1.5 लाख रुपये TCS के तौर पर लगते थे, लेकिन अब यह घटकर सिर्फ 60,000 रुपये रह जाएंगे। इससे लोगों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा और पढ़ाई का प्लान बनाने और भुगतान करने में काफी आसानी होगी।

यह सिर्फ कंज्यूमर के लिए राहत नहीं, एक बड़ी स्ट्रेटेजी!

TCS में यह कटौती सिर्फ ग्राहकों को तुरंत मिलने वाली राहत नहीं है, बल्कि यह भारत की Liberalised Remittance Scheme (LRS) को लेकर सरकार की नई रणनीतिक सोच को भी दर्शाती है। LRS, जो 2004 से लागू है, व्यक्तियों को सालाना 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर तक विदेश भेजने की सुविधा देती है। अक्टूबर 2023 में TCS दरें बढ़ाने के बाद अब इस कटौती से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा ट्रांजैक्शन (Transactions) औपचारिक चैनलों के जरिए हों। इससे अनौपचारिक मनी ट्रांसफर कम हो सकते हैं और शिक्षा व टूरिज्म जैसे अहम सेक्टर्स को बढ़ावा मिलेगा, जो देश के लिए फॉरेन करेंसी (Foreign Currency) लाते हैं। Wise, Western Union, MoneyGram जैसी कंपनियां और घरेलू बैंक इस बढ़ते डिजिटल मार्केट में सक्रिय हैं, लेकिन अब कस्टमर्स के लिए सिर्फ टैक्स ही नहीं, बल्कि एक्सचेंज रेट (Exchange Rate) और कुल खर्च पर भी ध्यान देना होगा।

कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी

हालांकि, इस टैक्स कटौती से फॉरेन एक्सचेंज मार्कअप (Foreign Exchange Markup) का खर्च कम नहीं होगा, जो बड़े ट्रांसफर में 3% तक अतिरिक्त चार्ज जोड़ सकता है और टैक्स बचत को कम कर सकता है। इसके अलावा, चुकाया गया TCS असल में एडवांस टैक्स पेमेंट (Advance Tax Payment) होता है, जिसे इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) फाइल करने पर ही क्रेडिट (Credit) या रिफंड (Refund) के तौर पर वापस पाया जा सकता है। यानी, तुरंत मिलने वाले कैश फ्लो बेनिफिट (Cash Flow Benefit) में देरी होगी। हालांकि 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर की LRS लिमिट वही है, लेकिन कुछ धनी व्यक्ति इन स्कीमों का गलत इस्तेमाल विदेशी संपत्तियों के प्रबंधन (Offshore Wealth Management) के लिए भी कर सकते हैं। ऐसे में, पारदर्शी प्राइसिंग (Transparent Pricing) और कम एक्सचेंज रेट वाले प्रोवाइडर (Provider) टैक्स कटौती के बावजूद अपनी जगह बनाए रखेंगे।

आगे क्या उम्मीद करें?

इस पॉलिसी (Policy) से सरकार अपनी कैपिटल अकाउंट (Capital Account) को मैनेज करने की कोशिश कर रही है, ताकि घरेलू आर्थिक लक्ष्यों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संबंधों के बीच संतुलन बना रहे। रेमिटेंस मार्केट (Remittance Market) का लगातार बढ़ना जारी रहने की उम्मीद है, जो डिजिटलाइजेशन (Digitalization) और जनसांख्यिकी रुझानों (Demographic Trends) से प्रेरित है। TCS में सरलता से यह वृद्धि और तेज हो सकती है। इसका दीर्घकालिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ये टैक्स बदलाव, मनी ट्रांसफर सर्विसेज के बीच प्रतिस्पर्धा (Competition) और आर्थिक स्थिति के साथ कैसे तालमेल बिठाते हैं। फिनटेक (Fintech) में लगातार हो रहे नवाचार (Innovation) व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए क्रॉस-बॉर्डर (Cross-border) मनी मूवमेंट को और भी आसान और किफ़ायती बनाएंगे।

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