बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ₹5,000 की मासिक SIP एक अच्छी शुरुआत हो सकती है, लेकिन बढ़ती महंगाई, खासकर शिक्षा के क्षेत्र में, इस योजना को फीका कर रही है।
SIP का अनुमानित रिटर्न बनाम बच्चों का खर्च
अगर आप 18 सालों तक लगातार ₹5,000 हर महीने इन्वेस्ट करते हैं और मान लें कि आपको सालाना 12% का रिटर्न मिलता है, तो कुल मिलाकर आपकी जमा-पूंजी लगभग ₹37.89 लाख तक पहुँच सकती है। इसमें आपका लगाया हुआ ₹10.8 लाख और कंपाउंडिंग से कमाया गया ₹27.09 लाख शामिल होगा। यह दिखाता है कि लंबी अवधि में निवेश कितना फायदेमंद हो सकता है।
हालांकि, यह राशि भारत में एक बच्चे को बड़े होने तक पालने के वास्तविक खर्चों के मुकाबले काफी कम है। अनुमान है कि जब बच्चा 18-21 साल का होगा, तब तक परवरिश का कुल खर्च ₹55 लाख से बढ़कर ₹85 लाख या कुछ अनुमानों के अनुसार ₹1 करोड़ से भी ऊपर जा सकता है। यह बड़ा अंतर माता-पिता के लिए एक बड़ी वित्तीय चुनौती खड़ी करता है।
इस गैप की मुख्य वजह है शिक्षा महंगाई, जो सालाना 8-12% की रफ्तार से बढ़ रही है। यह महंगाई सामान्य वस्तुओं की कीमतों से कहीं ज़्यादा है। ऐसे में, फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposits) जैसी पारंपरिक बचत योजनाओं पर मिलने वाला रिटर्न अक्सर महंगाई दर से कम रह जाता है, जिससे आपकी बचत की असल कीमत (रियल रिटर्न) घट जाती है।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि इस बढ़ते गैप को पाटने के लिए, निवेशकों को अपनी SIP राशि बढ़ानी चाहिए। इसके अलावा, 'स्टेप-अप' SIP (जो समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ती है) और अनुशासित, लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान देना ज़रूरी है।
