Income Tax Audit: सिर्फ ऑडिट रिपोर्ट फाइल करना काफी नहीं, ITR भरना है जरूरी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Income Tax Audit: सिर्फ ऑडिट रिपोर्ट फाइल करना काफी नहीं, ITR भरना है जरूरी

जिन टैक्सपेयर्स का टैक्स ऑडिट होना है, उन्हें **30 सितंबर** तक ऑडिट रिपोर्ट और **31 अक्टूबर** तक ITR फाइल करना अनिवार्य है। केवल ऑडिट रिपोर्ट भर देने से आप अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं होते, क्योंकि इनकम टैक्स विभाग डेटा की पूरी जांच करता है।

टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया (Compliance Process) दो चरणों में पूरी होती है। 30 सितंबर तक टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करना पहली शर्त है, लेकिन इसके बाद भी आपको 31 अक्टूबर तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) स्वतंत्र रूप से दाखिल करना होगा। कई टैक्सपेयर्स यह गलती कर बैठते हैं कि ऑडिट फाइल करते ही उनका काम खत्म हो गया, जबकि ये दोनों तारीखों के बीच का समय डेटा मिलान (Reconciliation) के लिए बेहद अहम होता है।

डेटा मिलान (Data Reconciliation) क्यों जरूरी है?

इनकम टैक्स विभाग अब रिटर्न की जांच के लिए ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग का इस्तेमाल करता है। यदि आपके ITR में दी गई जानकारी ऑडिट रिपोर्ट, Form 3CD या ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स से मेल नहीं खाती, तो सिस्टम आपके रिटर्न को स्क्रूटनी में डाल सकता है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि छोटी सी विसंगति भी सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) से नोटिस या टैक्स डिमांड का कारण बन सकती है। इसलिए रिटर्न सबमिट करने से पहले नेट प्रॉफिट, ग्रॉस टर्नओवर और डेप्रिसिएशन जैसे प्रमुख आंकड़ों को सभी दस्तावेजों में चेक कर लें।

GST और AIS से रखें तालमेल

नोटिस मिलने का एक बड़ा कारण GST रिटर्न और इनकम टैक्स फाइलिंग के आंकड़ों में अंतर होना है। हालांकि कुछ अंतर अकाउंटिंग ट्रीटमेंट के कारण हो सकते हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट रूप से डॉक्यूमेंट करना जरूरी है। इसके अलावा, TDS, TCS और एडवांस टैक्स क्रेडिट को हमेशा Annual Information Statement (AIS) और Form 26AS से वेरिफाई करें। इनके मेल न खाने से टैक्स रिफंड में देरी हो सकती है।

गलतियों को कैसे सुधारें?

एक बार इनकम टैक्स पोर्टल पर ऑडिट रिपोर्ट अपलोड हो जाने के बाद उसमें सीधे बदलाव नहीं किया जा सकता। यदि फाइलिंग के बाद कोई गलती सामने आती है, तो अपने ऑडिटर से संपर्क करें। कानून के दायरे में रहते हुए, ऑडिटर रिवाइज्ड ऑडिट रिपोर्ट अपलोड कर सकते हैं। हमेशा ध्यान रखें कि ITR केवल फाइनल और सही रिपोर्ट के आंकड़ों से ही भरें और रिटर्न में अपडेटेड Unique Document Identification Number (UDIN) का ही उपयोग करें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.