Mumbai ITAT ने पति-पत्नी के बीच हुई प्रॉपर्टी खरीद पर **₹6.91 करोड़** की Section 54F टैक्स छूट को मंजूरी दी है। ट्रिब्यूनल ने इसे 'कलरएबल डिवाइस' मानने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि ठोस फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन वाली पारिवारिक डील पर टैक्स बेनिफिट्स मिलते रहेंगे।
क्या था पूरा मामला?
Mumbai ITAT की बेंच ने सेक्शन 54F के तहत टैक्स छूट को लेकर अहम क्लैरिटी दी है। एक मामले में करदाता ने अपने पति की प्रोप्राइटरशिप से रेजिडेंशियल फ्लैट खरीदा और ₹6.91 करोड़ की टैक्स छूट मांगी। टैक्स अथॉरिटीज ने इसे 'कलरएबल डिवाइस' (सिर्फ टैक्स बचाने की जुगत) करार देकर दावा खारिज कर दिया था। विभाग का तर्क था कि पति अपने कैपिटल गेन्स को बिजनेस लॉस के खिलाफ सेट-ऑफ करना चाहता था।
ट्रिब्यूनल ने कैसे बदली तस्वीर?
ITAT ने घटनाओं की टाइमलाइन (Timeline) की बारीकी से जांच की, जो फैसले का मुख्य आधार बनी। ट्रिब्यूनल ने पाया कि प्रॉपर्टी का ट्रांसफर जून 2021 में हुआ था, जबकि बिजनेस लॉस का जिक्र मार्च 2022 में आया। चूंकि ट्रांजैक्शन घाटे से कई महीने पहले ही पूरा हो चुका था, इसलिए ट्रिब्यूनल ने इसे टैक्स चोरी का जरिया मानने से साफ इनकार कर दिया।
निवेशकों के लिए सबक (Key Takeaways)
यह फैसला पारिवारिक प्रॉपर्टी डील्स के लिए एक बड़ा राहत भरा कदम है, लेकिन यह कोई 'ब्लैंकेट अप्रूवल' नहीं है। ITAT ने स्पष्ट किया कि हर ट्रांजैक्शन के लिए ठोस सबूत होने चाहिए:
- रजिस्टर्ड सेल डीड: ट्रांजैक्शन की कानूनी वैधता के लिए रजिस्टर्ड डीड जरूरी है।
- बैंकिंग रिकॉर्ड: सभी भुगतान बैंकिंग चैनल्स के जरिए होने चाहिए, ताकि पैसा का ट्रेल (Trail) साफ दिखे।
- TDS और कंप्लायंस: टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (TDS) के नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
अंत में, ट्रिब्यूनल ने जोर देकर कहा कि टैक्स विभाग हमेशा रिलेटेड पार्टियों के बीच होने वाले ट्रांजैक्शंस की जांच करता है। इसलिए, भविष्य में किसी भी विवाद से बचने के लिए कागज-पत्रों को दुरुस्त रखना ही एकमात्र सुरक्षित रास्ता है।
