ITAT ने NRI निवेशकों के लिए टैक्स नियमों को स्पष्ट किया है। अब प्रॉपर्टी बेचने पर ट्रैवल और रहने का खर्च तभी घटाया जा सकेगा, जब वह सीधे तौर पर बिक्री की प्रक्रिया से जुड़ा हो। व्यक्तिगत या पारिवारिक यात्राओं पर अब कोई छूट नहीं मिलेगी।
Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) की बेंगलुरु बेंच ने NRI (Non-Resident Indian) निवेशकों के लिए टैक्स कटौती के नियमों को लेकर बड़ी स्पष्टता दी है। नए फैसले के मुताबिक, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 48 के तहत ट्रैवल और रहने का खर्च तभी कैपिटल गेन्स में से घटाया जा सकता है, जब वह खर्च 'पूर्णतः और विशेष रूप से' प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन के लिए ही किया गया हो।
मामला और ट्रिब्यूनल का रुख
एक मामले में, अमेरिका में रहने वाले एक टैक्सपेयर ने ट्रैवल और लॉजिंग के नाम पर ₹12.01 लाख के बड़े खर्च का दावा किया था। कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया क्योंकि यह यात्रा सेल डीड होने से काफी पहले की गई थी। ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया कि टैक्स विभाग किसी भी तरह के 'ब्लैंकेट क्लेम' को स्वीकार नहीं करेगा।
प्रूफ जुटाना क्यों जरूरी?
अब आपकी जिम्मेदारी है कि आप हर खर्च का सबूत रखें। अगर आप अपनी यात्रा के साथ कोई पर्सनल वेकेशन जोड़ते हैं, तो वह पूरा खर्च अमान्य माना जाएगा। आपको फ्लाइट के टिकट, होटल के बिल और उन पत्राचारों (Correspondence) को संभाल कर रखना होगा, जो प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री या कानूनी प्रक्रिया की तारीखों से सीधे मेल खाते हों। सबूतों के अभाव में आपका दावा रिजेक्ट हो सकता है और आप पर टैक्स की भारी देनदारी आ सकती है।
अधिग्रहण लागत (Acquisition Cost) में राहत
जहां ट्रैवल खर्चों पर सख्ती बरती गई है, वहीं ट्रिब्यूनल ने 'कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन' को लेकर लचीलापन दिखाया है। अगर आपने होम लोन पर ₹21.60 लाख का ब्याज भरा है, जिसे आपने पहले धारा 24(b) के तहत क्लेम नहीं किया है, तो उसे अधिग्रहण लागत का हिस्सा माना जा सकता है। इसके अलावा, मेंटेनेंस डिपॉजिट और यूटिलिटी सिक्योरिटी पेमेंट्स को भी बेस कॉस्ट में शामिल करने की मंजूरी मिली है। इससे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स कम करने में मदद मिल सकती है।
टैक्स स्कूटनी का रिस्क
याद रखें, टैक्स विभाग अब डेटा एनालिटिक्स और AIS (Annual Information Statement) के जरिए हर लेन-देन पर नजर रख रहा है। प्रॉपर्टी रजिस्ट्रार और TDS रिकॉर्ड्स के मिलान के बाद विसंगतियां मिलने पर विभाग आपको स्कूटनी नोटिस भेज सकता है। पेनल्टी और ब्याज से बचने का एकमात्र तरीका यही है कि आप हर खर्च का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखें और टैक्स फाइलिंग में पारदर्शिता बरतें।
