Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) के हालिया फैसले से साफ है कि विरासत में मिले सोने का प्रूफ रखना अब अनिवार्य है। अगर आप साबित नहीं कर पाए कि गोल्ड कहां से आया, तो इसे 'अनएक्सप्लेंड इनकम' मानकर टैक्स विभाग आप पर बड़ी कार्रवाई कर सकता है।
मुंबई ITAT ने एक अहम फैसले में यह साफ कर दिया है कि परिवारों के पास मौजूद पुश्तैनी ज्वेलरी के लिए पुख्ता रिकॉर्ड होना बेहद जरूरी है। हाल के एक मामले में, ₹67.4 लाख की ज्वेलरी घोषित करने वाले एक टैक्सपेयर को तब राहत मिली जब उसने सोने की उत्पत्ति का ठोस सबूत पेश किया। यह केस टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी सीख है कि अगर आपके पास कीमती एसेट हैं और उनके सोर्स का पता नहीं है, तो विभाग उन पर सवाल उठा सकता है।
Section 69A के तहत बड़ा रिस्क
Income Tax Act की धारा 69A के तहत, यदि कोई व्यक्ति अपने पास मौजूद सोने या ज्वेलरी का सोर्स बताने में नाकाम रहता है, तो उसे 'अनएक्सप्लेंड इनकम' माना जा सकता है। ऐसे में ज्वेलरी की पूरी वैल्यू को आपकी टैक्सेबल इनकम में जोड़ दिया जाएगा, जिस पर भारी टैक्स और पेनल्टी लग सकती है। कानूनी तौर पर साबित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से टैक्सपेयर की है कि यह गोल्ड विरासत या गिफ्ट के जरिए मिला है।
सोने की लिमिट का भ्रम
अक्सर लोग CBDT की गाइडलाइंस को सोने की 'ओनरशिप लिमिट' समझ लेते हैं, जैसे विवाहित महिला के लिए 500 ग्राम, अविवाहित के लिए 250 ग्राम और पुरुषों के लिए 100 ग्राम। असल में, यह सीमा केवल छापेमारी के दौरान अधिकारियों को यह निर्देश देने के लिए है कि वे आम परिवारों के गहने जब्त न करें। यह सोने की अधिकतम सीमा नहीं है। अगर आपके पास तय सीमा से ज्यादा सोना है और आप उसका सोर्स (जैसे वसीयत या गिफ्ट डीड) साबित कर सकते हैं, तो उसे कोई जब्त नहीं कर सकता।
ऐसे तैयार करें अपना पेपर ट्रेल
पुश्तैनी सोने के लिए पुराने परचेज रसीदें मिलना मुश्किल हो सकता है, लेकिन आप अन्य दस्तावेजों से अपना पक्ष मजबूत कर सकते हैं:
- वसीयत (Will) और फैमिली सेटलमेंट डीड।
- पुराने वेल्थ-टैक्स रिटर्न और गिफ्ट डीड्स।
- फॉर्मल वैल्यूएशन रिपोर्ट और प्रोबेट डॉक्यूमेंट्स।
इन डॉक्यूमेंट्स को अभी व्यवस्थित करना न केवल टैक्स ऑडिट में मदद करेगा, बल्कि भविष्य में गोल्ड बेचने पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स की सही गणना के लिए भी जरूरी है।
