अहमदाबाद ITAT ने कुवैत में कार्यरत एक NRI को बड़ी राहत दी है। ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि विदेशी सैलरी को 'अनएक्सप्लेंड मनी' मानकर टैक्स नहीं लगाया जा सकता। कोर्ट ने **₹5.52 लाख** का टैक्स एडिशन हटा दिया है, जबकि **₹2.50 करोड़** के मामले की फिर से जांच के आदेश दिए हैं।
अहमदाबाद इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने उन NRI के लिए एक अहम मिसाल पेश की है जो अपनी विदेशी कमाई भारत भेजते हैं। यह मामला तब शुरू हुआ जब इनकम टैक्स विभाग ने HDFC बैंक और ICICI बैंक खातों में बड़ी रकम देखी और इसे 'अनएक्सप्लेंड मनी' (धारा 69A) मानकर भारी टैक्स (धारा 115BBE) ठोक दिया।
राहत की वजह और सबूत
टैक्सपेयर ने जब नेशनल बैंक ऑफ कुवैत के रिकॉर्ड्स, सैलरी स्लिप्स और बैंक स्टेटमेंट पेश किए, तो यह साबित हो गया कि यह पैसा वैध विदेशी कमाई का हिस्सा था। इसके बाद ITAT ने ₹5.52 लाख का एडिशन रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि कमाई का स्रोत साबित है, तो NRE अकाउंट में आए पैसे को काला धन नहीं माना जा सकता।
अभी पूरी राहत नहीं, ₹2.50 करोड़ की फिर से जांच
ट्रिब्यूनल ने ₹2.50 करोड़ के मामले में पूरी राहत नहीं दी है। ITAT ने असेसिंग ऑफिसर को इस रकम की दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं। कोर्ट का मानना है कि ट्रांजैक्शन-लेवल का पूरा डेटा और वन-टू-वन रिकॉन्सिलिएशन (reconciliation) पेश न करने के कारण इस हिस्से की सत्यता की पुष्टि जरूरी है।
NRIs के लिए सबक
यह केस सबक है कि विदेश से पैसा भारत भेजते समय उसका पूरा 'पेपर ट्रेल' (paper trail) मेंटेन करना अनिवार्य है। जब SFT सिस्टम के जरिए बड़े ट्रांजैक्शंस की पहचान होती है, तो इनकम टैक्स विभाग आपसे आय का सीधा संबंध (link) मांग सकता है। भविष्य में टैक्स स्क्रूटनी से बचने के लिए अपने विदेशी और NRE/NRO अकाउंट्स के बीच हर ट्रांसफर का हिसाब-किताब दुरुस्त रखना ही एकमात्र समाधान है।
