ITAT Jaipur का बड़ा फैसला: बुजुर्ग महिला पर लगा ₹5.15 लाख का टैक्स जुर्माना हुआ रद्द

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ITAT Jaipur का बड़ा फैसला: बुजुर्ग महिला पर लगा ₹5.15 लाख का टैक्स जुर्माना हुआ रद्द

ITAT Jaipur ने एक बुजुर्ग महिला को बड़ी राहत देते हुए उन पर लगाया गया **₹5.15 लाख** का टैक्स डिमांड हटा दिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब महिला ने ITR फाइल नहीं किया और नोटिस का जवाब नहीं दिया, जिससे अधिकारियों ने बैंक ट्रांजेक्शन को 'अनएक्सप्लेंड इनकम' मान लिया था।

ITAT (Income Tax Appellate Tribunal) जयपुर बेंच ने एक सीनियर सिटीजन को टैक्स विवाद में बड़ी राहत दी है। करीब 9 साल पुराने इस केस में अधिकारियों ने महिला के बैंक ट्रांजेक्शन को बिना किसी स्पष्टीकरण के 'अनएक्सप्लेंड इनकम' माना था और ₹5.15 लाख का टैक्स लगा दिया था। यह पूरी मुसीबत तब शुरू हुई जब महिला ने समय पर ITR फाइल नहीं किया और टैक्स डिपार्टमेंट के नोटिस का जवाब नहीं दिया, जिसके बाद असेसिंग ऑफिसर ने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 144 के तहत 'बेस्ट जजमेंट असेसमेंट' का उपयोग करते हुए यह टैक्स डिमांड खड़ी कर दी थी।

ट्रिब्यूनल ने क्यों खारिज की टैक्स डिमांड?

ट्रिब्यूनल ने पाया कि टैक्स विभाग के पास महिला की इनकम को लेकर कोई पुख्ता सबूत नहीं थे। विवादित राशि मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बंटी थी: FD मैच्योरिटी, कैश डिपॉजिट और अनुमानित रेगुलर इनकम।

  • FD मैच्योरिटी: ₹2.42 लाख की राशि के लिए महिला ने 2007 का ओरिजिनल FD रिसिप्ट और बैंक पासबुक पेश की, जिससे यह साबित हो गया कि यह उनकी अपनी ही पुरानी जमा पूंजी थी, न कि कोई नई कमाई।
  • कैश डिपॉजिट: ₹1.06 लाख के डिपॉजिट पर ट्रिब्यूनल ने पाया कि महिला ने पहले ₹2.45 लाख कैश निकाले थे। विभाग यह साबित नहीं कर सका कि वह पैसा खर्च हो गया है, इसलिए इसे पुरानी बचत का हिस्सा माना गया।
  • अनुमानित आय: असेसिंग ऑफिसर ने ₹1.5 लाख को 'अनुमानित आय' मानकर टैक्स लगाया था, जिसे ट्रिब्यूनल ने यह कहते हुए हटा दिया कि टैक्स विभाग केवल अटकलों के आधार पर किसी को टैक्स नहीं लगा सकता।

नोटिस नजरअंदाज करना कितना रिस्की?

यह मामला सभी टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी सीख है। ITR न भरना या नोटिस को इग्नोर करना टैक्सपेयर पर 'बर्डन ऑफ प्रूफ' डाल देता है, जिससे बाद में सामान्य ट्रांजेक्शन को साबित करना भी मुश्किल हो जाता है। भले ही इस केस में बुजुर्ग महिला जीत गई, लेकिन इसके लिए उन्हें 9 साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। समझदारी इसी में है कि अपने बैंक स्टेटमेंट और डिपॉजिट रिसिप्ट को संभाल कर रखें और टैक्स विभाग के किसी भी नोटिस का जवाब तुरंत दें, ताकि मामला बेवजह न उलझे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.