Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) की दिल्ली बेंच ने एक टैक्सपेयर को बड़ी राहत दी है। समय पर ITR फाइल न करने के कारण लगाए गए **₹3.74 लाख** के जुर्माने को ट्रिब्यूनल ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि चूंकि टैक्स पहले ही TDS के जरिए जमा हो चुका था और आय की पूरी जानकारी थी, इसलिए इसे टैक्स चोरी नहीं माना जा सकता।
यह मामला असेसमेंट ईयर 2019-20 से जुड़ा है। टैक्सपेयर प्रवेश अग्रवाल ने फाइनेंशियल ईयर 2018-19 के दौरान ₹30 लाख से ज्यादा की सैलरी कमाई थी। हालांकि, पुरानी कंपनी से फॉर्म 16 मिलने में देरी के चलते वह समय पर अपना ITR फाइल नहीं कर पाए। उनका मानना था कि चूंकि उनका टैक्स पहले ही TDS के जरिए कट चुका है और फॉर्म 26AS में दिख रहा है, इसलिए अलग से फाइलिंग की जरूरत नहीं है।
टैक्स विभाग का तर्क और ITAT का फैसला
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इसे 'अंडर-रिपोर्टिंग ऑफ इनकम' मानते हुए सेक्शन 270A के तहत भारी जुर्माना लगा दिया था। जब मामला ITAT के पास पहुंचा, तो जुडिशियल मेंबर अनुभव शर्मा और अकाउंटेंट मेंबर मनीष अग्रवाल की बेंच ने कानून का बारीकी से विश्लेषण किया।
ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि 'अंडर-रिपोर्टिंग' तब होती है जब कोई अपनी वास्तविक कमाई से कम आय दिखाता है। इस केस में, टैक्सपेयर ने जो आय बाद में घोषित की, वह विभाग के पास मौजूद TDS रिकॉर्ड से मेल खा रही थी। चूंकि कोई तथ्य छिपाया नहीं गया था, इसलिए ट्रिब्यूनल ने कहा कि सिर्फ प्रक्रियात्मक देरी के लिए भारी जुर्माना लगाना उचित नहीं है।
टैक्सपेयर्स के लिए सबक
हालांकि यह फैसला राहत भरा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसे ITR फाइल करने में लापरवाही का लाइसेंस नहीं समझना चाहिए। फॉर्म 26AS को कभी भी रिटर्न फाइलिंग का विकल्प नहीं मानना चाहिए। कानूनी उलझनों से बचने के लिए तय समय सीमा में ITR भरना अब भी अनिवार्य है, भले ही आपका टैक्स पूरा जमा हो चुका हो।
