दिल्ली ITAT ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ₹1.13 करोड़ का टैक्स जुर्माना हटा दिया है। ट्रिब्यूनल ने माना कि बेटी की शादी के गहनों को मायके में रखना एक सामान्य परंपरा है, लेकिन टैक्स से बचने के लिए पुख्ता डॉक्यूमेंट्स होना अनिवार्य है।
दिल्ली स्थित इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) की बेंच ने एक टैक्सपेयर को बड़ी राहत देते हुए ₹1.13 करोड़ का टैक्स एडिशन रद्द कर दिया है। असेसमेंट ईयर 2019-20 से जुड़े इस मामले की शुरुआत तब हुई जब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की छापेमारी के दौरान घर से 3.9 किलो सोना और ₹21 लाख नकद बरामद हुए थे। टैक्स अधिकारियों ने इसे बेहिसाब आय (Unexplained Income) मान लिया था।
अदालत का तर्क और राहत
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि भारतीय परिवारों में विवाहित बेटी के गहने उसके मायके में रखे जाना एक आम और सांस्कृतिक चलन है। बेंच ने डिपार्टमेंट की दलीलों को खारिज कर दिया क्योंकि टैक्सपेयर ने अपनी बात साबित करने के लिए इन-लॉज के एफिडेविट, शादी की तस्वीरें और बैंक विड्रॉल स्टेटमेंट जैसे ठोस सबूत पेश किए थे।
टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी सीख
यह फैसला निवेशकों और हाई-नेट-वर्थ व्यक्तियों के लिए एक चेतावनी है। ITAT की जीत का मतलब यह नहीं है कि आप बिना हिसाब के संपत्ति रख सकते हैं। ट्रिब्यूनल ने माना कि बिना खरीद के बिल, गिफ्ट डीड या वंशावली के दस्तावेज के बिना बड़ी संपत्ति को 'अनएक्सप्लेंड इनकम' की श्रेणी में आने से बचाना मुश्किल होता है।
गोल्ड रखने की सीमा क्या है?
टैक्सपेयर्स को सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) की गाइडलाइंस का ध्यान रखना चाहिए। हालांकि ये कोई कानून नहीं, बल्कि प्रशासनिक दिशानिर्देश हैं, लेकिन आमतौर पर 500 ग्राम (विवाहित महिला), 250 ग्राम (अविवाहित महिला) और 100 ग्राम (पुरुष) तक के सोने पर छापेमारी के दौरान कोई दिक्कत नहीं आती। अगर आपके पास इससे ज्यादा की ज्वेलरी है, तो उसके रसीद और सोर्स के दस्तावेज संभालकर रखना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
