ग्लोबल मार्केट में क्यों है ये सलाह ज़रूरी?
आजकल ग्लोबल मार्केट में काफी हलचल देखने को मिल रही है। जियो-पॉलिटिकल टेंशन (geopolitical tensions), कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और करेंसी की बड़ी चालें (currency swings) मिलकर एक अनिश्चित माहौल बना रही हैं।
Active और Passive फंड्स का 'स्मार्ट' मिक्स क्यों?
ऐसे मुश्किल दौर में, ICRA Analytics एक खास स्ट्रेटेजी (strategy) अपनाने की सलाह दे रहा है। फर्म का मानना है कि जहां पैसिव फंड्स (passive funds) स्थिर बाजारों में बढ़िया काम करते हैं, वहीं वोलेटाइल (volatile) समय में एक्टिव फंड मैनेजर्स (active fund managers) की भूमिका अहम हो जाती है। वे सेक्टर एलोकेशन (sector allocation) को डायनामिकली एडजस्ट कर सकते हैं, महंगे स्टॉक्स को पहचान कर उनसे बच सकते हैं और बाजार के मौकों का फायदा उठा सकते हैं, खासकर तब जब ग्लोबल फैक्टर घरेलू ट्रेंड्स पर भारी पड़ रहे हों।
एक्स्पर्ट की राय क्या कहती है?
ICRA Analytics के अश्विनी कुमार (Ashwini Kumar) का कहना है कि जब ग्लोबल डेवलपमेंट (global developments) घरेलू इकोनॉमिक फंडामेंटल्स (economic fundamentals) पर हावी हो जाते हैं, तो एक्स्पीरिएंस (experience) और गहरी रिसर्च (deep research) बहुत मायने रखती है। उन्होंने जोर देकर कहा, "ऐसे माहौल में, निवेशकों को शॉर्ट-टर्म मार्केट टाइमिंग (short-term market timing) पर कम और एक्टिव और पैसिव स्ट्रेटेजीज को मिलाने पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए।"
ज़रूरी बातें:
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि म्यूचुअल फंड्स (mutual funds) में मार्केट रिस्क (market risk) शामिल होता है, और कीमतों में शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव निवेश का एक सामान्य हिस्सा है। मार्केट की चालों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय, ICRA Analytics निवेशकों को अपने लॉन्ग-टर्म गोल्स (long-term goals) और रिस्क टॉलरेंस (risk tolerance) पर फोकस बनाए रखने की सलाह देता है। फर्म ने यह भी बताया कि उन्होंने एक्टिव और पैसिव फंड्स के परफॉर्मेंस (performance) की तुलना करने के लिए एक इंटरनल स्टडी (internal study) भी की है, ताकि गहराई से जानकारी दी जा सके।
