अचानक आई इनकम की कमी से निपटने के लिए एक ठोस प्लानिंग की जरूरत है। क्रेडिट स्कोर बचाने के लिए डिफॉल्ट करने के बजाय लेंडर से बात करें और SIP को बंद करने के बजाय कुछ समय के लिए 'पॉज' (Pause) करना बेहतर है।
अचानक आई आर्थिक मुश्किलों के बीच खुद को संभालना सर्वाइवल-फर्स्ट प्लानिंग के बिना मुमकिन नहीं है। सितंबर 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत में हाउसिंग लोन और अन्य कर्ज जीडीपी (GDP) का 41.3% तक पहुंच चुके हैं, जिसमें से 55% हिस्सा अनसिक्योर्ड लोन जैसे कि पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड का है। ऐसे में जॉब लॉस या बिजनेस में गिरावट आने पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।
कर्ज का सही प्रबंधन (Proactive Debt Management)
इनकम बंद होने पर सबसे बड़ी गलती EMI को बिना बताए छोड़ देना है। ऐसा करने से न केवल पेनल्टी लगती है, बल्कि क्रेडिट स्कोर पर भी भारी असर पड़ता है। बैंक अक्सर पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए आपको 'रीस्ट्रक्चरिंग' (Restructuring) या 'इंटरेस्ट-ओनली पेमेंट' जैसे विकल्प दे सकते हैं। डिफॉल्ट नोटिस का इंतजार करने से बेहतर है कि बैंक से पहले ही बात कर ली जाए।
बजट और कैश फ्लो (Budgeting and Cash Flow)
कैश की कमी होने पर घर का किराया, बिजली-पानी का बिल, खाने-पीने का खर्च और इंश्योरेंस प्रीमियम को पहली प्राथमिकता दें। गैर-जरूरी खर्चों को तुरंत काट दें। सबसे बड़ी भूल क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके गुजारा करना है, क्योंकि इसका ब्याज आपकी मुसीबत को कई गुना बढ़ा सकता है। इमरजेंसी फंड को बचाकर रखना ही समझदारी है।
निवेश को कैसे बचाएं? (Protecting Investments)
म्यूचुअल फंड में चल रही SIP को पूरी तरह बंद करना आखिरी विकल्प होना चाहिए। अधिकांश प्लेटफॉर्म आपको SIP को कुछ समय के लिए 'पॉज' (Pause) करने की सुविधा देते हैं। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के नियमों के तहत, खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने पर लगातार फेल्ड ट्रांजेक्शन से आपकी SIP अपने आप बंद हो सकती है, इसलिए इस ओर ध्यान दें।
बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ती महंगाई के दौर में घबराकर अपने लॉन्ग-टर्म एसेट्स को न बेचें। शेयर बेचने से न केवल एग्जिट लोड (Exit Load) लगता है और टैक्स पर असर पड़ता है, बल्कि आप कंपाउंडिंग के फायदे से भी हाथ धो बैठते हैं। जब तक पूरी तरह लाचार न हों, तब तक निवेश को न छुएं। सबसे पहले अपने इमरजेंसी फंड को फिर से तैयार करें और कर्ज का निपटारा करने के बाद ही दोबारा निवेश की ओर बढ़ें।
