होम लोन: EMI घटाएं या टेन्योर छोटा करें? समझें आपके लिए क्या है बेहतर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
होम लोन: EMI घटाएं या टेन्योर छोटा करें? समझें आपके लिए क्या है बेहतर

RBI के रेपो रेट को **5.25%** पर स्थिर रखने के बाद, बहुत से होम लोन लेने वाले अपनी लोन की EMI और टेन्योर (Loan Tenure) को लेकर सोच-विचार कर रहे हैं। सवाल यह है कि EMI कम की जाए या लोन चुकाने की अवधि छोटी की जाए? यह फैसला आपकी वर्तमान आर्थिक स्थिति और भविष्य के लक्ष्यों पर निर्भर करता है। आइए समझते हैं कि दोनों में से कौन सी रणनीति आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती है।

EMI घटाएं या टेन्योर छोटा करें?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त 2026 की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है। इसका सीधा असर होम लोन की ब्याज दरों पर पड़ा है, जो फिलहाल ज्यादातर फ्लोटिंग रेट वाले लोन के लिए स्थिर हैं। ऐसे में, होम लोन लेने वाले अक्सर एक दुविधा में रहते हैं: क्या वे अपनी हर महीने की EMI (Equated Monthly Installment) कम कर लें या EMI वही रखते हुए लोन चुकाने की अवधि (Tenure) को छोटा कर लें?

EMI कम करने के फायदे और नुकसान

EMI को कम करने से आपको हर महीने तुरंत राहत मिलती है। यह उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनका बजट टाइट है या जो किसी इमरजेंसी फंड की तैयारी कर रहे हैं। हर महीने कम EMI भरने से आपके हाथ में ज्यादा पैसा बचता है, जिसे आप बढ़ती महंगाई का सामना करने या किसी दूसरे महंगे लोन को चुकाने में इस्तेमाल कर सकते हैं।

लेकिन, इसका एक बड़ा नुकसान भी है। EMI कम करने का सीधा मतलब है कि आप अपने होम लोन को चुकाने में ज्यादा समय लेंगे। होम लोन का इंटरेस्ट (Interest) बकाया राशि पर कैलकुलेट होता है। अगर लोन की अवधि लंबी खिंच जाती है, तो बैंक को कुल मिलाकर ज्यादा ब्याज मिलता है। कई बार, हर महीने बचाए गए ये पैसे खर्च हो जाते हैं, जिससे लोन चुकाने की कुल लागत बढ़ जाती है।

टेन्योर छोटा करने के फायदे

इसके विपरीत, यदि आप अपनी EMI वही बनाए रखते हैं (भले ही ब्याज दरें थोड़ी कम हों), तो यह लोन को तेजी से चुकाने की एक बेहतरीन रणनीति है। जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो EMI का एक बड़ा हिस्सा मूलधन (Principal) की ओर जाता है। यदि आप अपनी EMI को पहले जितना ही रखते हैं, तो यह अतिरिक्त पैसा सीधे मूलधन को कम करता है। इससे लोन बहुत तेजी से खत्म होता है और आप लंबे समय में ब्याज पर काफी बचत करते हैं।

लोन के किस स्टेज पर क्या चुनें?

लोन लेते समय, यह भी सोचना जरूरी है कि आपका लोन कितने साल का है। होम लोन के शुरुआती सालों में EMI का ज्यादातर हिस्सा ब्याज चुकाने में जाता है। ऐसे में, अगर आप लोन की अवधि को जल्दी छोटा करते हैं, तो आपको ब्याज पर सबसे ज्यादा फायदा मिलता है। जैसे-जैसे लोन पुराना होता जाता है, टेन्योर छोटा करने का असर कम होने लगता है।

आखिरी फैसला लेने से पहले

कोई भी फैसला लेने से पहले, अपने बैंक से एक नया एम्पोर्टाइजेशन शेड्यूल (Amortization Schedule) जरूर मांगें। इससे आपको यह साफ पता चल जाएगा कि अलग-अलग रिपेमेंट ऑप्शन में आपकी कुल ब्याज लागत कितनी बदलेगी। हालांकि RBI ने फ्लोटिंग रेट वाले लोन में पारदर्शिता को अनिवार्य किया है और व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के लिए प्रीपेमेंट पेनल्टी पर रोक लगाई है, फिर भी बैंक की अपनी कुछ प्रक्रियाएं हो सकती हैं। इसलिए, यह जांचना जरूरी है कि क्या बैंक ने ब्याज दरों में हुई किसी भी संभावित बचत का लाभ आपको दिया है या लोन की शर्तों को मौजूदा रेपो-लिंक्ड बेंचमार्क के अनुसार सही ढंग से समायोजित किया है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.