होम लोन या कैश? खरीदारों के लिए जानिए फायदे और नुकसान!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
होम लोन या कैश? खरीदारों के लिए जानिए फायदे और नुकसान!

घर खरीदते समय कैश पेमेंट करें या होम लोन लें? यह एक बड़ा फैसला है। जहाँ एक तरफ कैश से आप कर्ज-मुक्त हो जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ सेविंग्स बनाए रखना आपको प्रॉपर्टी खरीदने के बाद के खर्चों जैसे रजिस्ट्रेशन और इंटीरियर के लिए आर्थिक सुरक्षा देता है।

नई प्रॉपर्टी के बाद लिक्विडिटी क्यों जरूरी है?

जब आप नया घर खरीदते हैं, तो प्रॉपर्टी की कीमत के अलावा भी कई छोटे-बड़े खर्चे सामने आते हैं। इनमें स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, इंटीरियर का सामान और शिफ्टिंग का खर्च शामिल है। अगर खरीदार अपनी सारी सेविंग्स प्रॉपर्टी खरीदने में ही लगा दे, तो इन जरूरी खर्चों के लिए उनके पास पैसे नहीं बचेंगे। ऐसी स्थिति में, अचानक आने वाली किसी इमरजेंसी के लिए भी हाथ तंग हो सकते हैं। इसलिए, पूरी रकम एक साथ देने के बजाय कुछ लिक्विड फंड्स (जैसे सेविंग्स या लिक्विड इन्वेस्टमेंट) को बनाए रखना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है।

ब्याज की लागत बनाम फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी

होम लोन लेने से आप प्रॉपर्टी की पेमेंट को कई सालों में बांट सकते हैं, और अपनी बाकी की पूंजी कहीं और इनवेस्ट कर सकते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट प्लानिंग जैसे दूसरे जरूरी कामों के लिए पैसा उपलब्ध रहता है। लेकिन, इस सुविधा की एक कीमत है। होम लोन पर 15 से 20 साल तक चुकाया जाने वाला कुल ब्याज प्रॉपर्टी की असली लागत को काफी बढ़ा देता है। जो लोग मन की शांति को प्राथमिकता देते हैं और जिन्हें यकीन है कि उन्हें अपनी पूंजी की कहीं और जरूरत नहीं पड़ेगी, वे पूरी पेमेंट करके ब्याज का सारा खर्च बचा सकते हैं।

टैक्स बेनिफिट्स का मूल्यांकन

बहुत से खरीदार होम लोन पर मिलने वाले टैक्स डिडक्शन का फायदा उठाने के लिए लोन का विकल्प चुनते हैं। इनकम-टैक्स एक्ट के तहत, होम लोन के प्रिंसिपल और इंटरेस्ट पेमेंट पर टैक्स में छूट मिलती है। हालांकि, यह छूट आमतौर पर बैंक को चुकाए जाने वाले कुल ब्याज को पूरी तरह से कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं होती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैक्स बेनिफिट्स को एक अतिरिक्त फायदा माना जाना चाहिए, न कि फैसला लेने का मुख्य कारण। मुख्य फैसला आपकी फैमिली की लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल कंफर्ट और रिस्क लेने की क्षमता पर आधारित होना चाहिए।

भविष्य की प्लानिंग के लिए फैक्टर्स

यह तय करते समय, अपनी जॉब की स्टेबिलिटी, किसी अन्य मौजूदा फाइनेंशियल ऑब्लिगेशन्स और अपनी एक्सपेक्टेड फ्यूचर इनकम का आकलन करना मददगार होता है। यदि कोई खरीदार लोन लेने का फैसला करता है, तो कम से कम 6 महीने की EMI और घर के खर्चों को कवर करने के लिए एक इमरजेंसी फंड बनाए रखना समझदारी है। इससे जॉब जाने या किसी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में भी प्रॉपर्टी सुरक्षित रहती है। आखिरकार, सबसे अच्छा रास्ता खरीदार की अपनी मौजूदा हाउसिंग एस्पिरेशन्स और एक स्टेबल व फ्लेक्सिबल फाइनेंशियल फ्यूचर की जरूरत के बीच संतुलन बनाने की क्षमता पर निर्भर करता है।

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