Home Loan Tax Breaks: अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर टैक्स छूट के बदले 2026 के नए नियम

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AuthorMehul Desai|Published at:
Home Loan Tax Breaks: अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर टैक्स छूट के बदले 2026 के नए नियम

अंडर-कंस्ट्रक्शन घर पर टैक्स डिडक्शन का फायदा तभी मिलता है जब पजेशन मिल जाता है। डिफॉल्ट 'न्यू टैक्स रिजीम' के कारण कई होमबायर्स इस छूट को गंवा सकते हैं, इसलिए सावधानी जरूरी है।

बहुत से होमबायर्स यह गलती कर बैठते हैं कि अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के लिए EMI शुरू होते ही टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है। लेकिन 2026 के इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, प्रॉपर्टी का काम पूरा होने और पजेशन मिलने के बाद ही आप टैक्स डिडक्शन के लिए योग्य होते हैं।

प्री-कंस्ट्रक्शन इंटरेस्ट का नियम

कंस्ट्रक्शन फेज के दौरान डिडक्शन भले न मिले, लेकिन इस दौरान चुकाया गया ब्याज बेकार नहीं जाता। लोन लेने से लेकर पजेशन वाले साल से ठीक पहले तक के पूरे ब्याज को जोड़ा जाता है। इसे 'प्री-कंस्ट्रक्शन इंटरेस्ट' कहते हैं। नियम के अनुसार, पजेशन मिलने के बाद इस कुल रकम को 5 बराबर किस्तों में 5 सालों तक क्लेम किया जा सकता है।

2026 का टैक्स रिजीम चैलेंज

अब 'न्यू टैक्स रिजीम' डिफॉल्ट ऑप्शन है, जिसमें सेक्शन 24(b) और सेक्शन 80C जैसी छूटें नहीं मिलतीं। अगर आप होम लोन का फायदा लेना चाहते हैं, तो आपको सोच-समझकर 'ओल्ड टैक्स रिजीम' को चुनना होगा। आपको कैलकुलेट करना होगा कि पुरानी रिजीम में मिलने वाली छूट से आपका कितना टैक्स बच रहा है, वरना आप अपना 'टैक्स शील्ड' गंवा बैठेंगे।

लिमिट्स और रेंटल इनकम

सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर के लिए इंटरेस्ट डिडक्शन की सीमा ₹2 लाख सालाना है, जबकि प्रिंसिपल रिपेमेंट ₹1.5 लाख तक क्लेम कर सकते हैं। अगर घर किराए पर है, तो ब्याज की कोई ऊपरी सीमा नहीं है। हालांकि, हाउस प्रॉपर्टी से होने वाला नुकसान अन्य इनकम से केवल ₹2 लाख तक ही सेट-ऑफ हो सकता है।

ध्यान रखें ये जोखिम

प्रोजेक्ट में देरी होने पर आपके टैक्स बेनिफिट्स भी लटक जाते हैं। बैंक से इंटरेस्ट सर्टिफिकेट और पजेशन का प्रमाण संभाल कर रखें। फाइलिंग से पहले दोनों रिजीम की तुलना जरूर करें, ताकि आप सही फैसला ले सकें और बचत का लाभ उठा सकें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.