Home Loan Rates: बढ़ती दरों के बीच क्या चुनें? ज्यादा EMI या लंबा Tenure

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AuthorMehul Desai|Published at:
Home Loan Rates: बढ़ती दरों के बीच क्या चुनें? ज्यादा EMI या लंबा Tenure

बढ़ती ब्याज दरों के दौर में होम लोन ग्राहकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है- EMI बढ़ाएं या लोन का टेन्योर (Tenure) लंबा करें? अपनी आर्थिक स्थिरता के लिए सही चुनाव करना अब बेहद जरूरी हो गया है।

भारत में ज्यादातर फ्लोटिंग-रेट होम लोन 'एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट' (EBLR) से जुड़े होते हैं, जो सीधे तौर पर Reserve Bank of India (RBI) की रेपो रेट पर निर्भर करते हैं। जैसे ही रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है, बैंक इस अतिरिक्त बोझ को ग्राहकों पर डाल देते हैं, जिससे मौजूदा लोन पर ब्याज दरें तुरंत बढ़ जाती हैं। ऐसे में कर्जदारों के पास दो मुख्य रास्ते होते हैं: या तो मासिक EMI बढ़ाना या फिर लोन चुकाने की अवधि (Tenure) को लंबा कर देना।

गणितीय उलझन (The Mathematical Trade-off)

लोन की अवधि बढ़ाने से घर के बजट पर तात्कालिक दबाव तो कम हो जाता है, लेकिन इसकी कीमत बहुत भारी पड़ती है। होम लोन 'रिड्यूसिंग-बैलेंस' मेथड पर काम करते हैं। अगर आप टेन्योर बढ़ाते हैं, तो ब्याज की गणना ज्यादा समय के लिए होती है। कई मामलों में, कुछ साल का टेन्योर बढ़ाने से कुल ब्याज की रकम मूलधन (Principal Amount) से भी कहीं ज्यादा हो जाती है।

EMI का विकल्प (Aggressive Debt Management)

ज्यादा EMI देना कर्ज कम करने का एक आक्रामक तरीका है। इससे मूलधन तेजी से घटता है, जिसके चलते लोन की अवधि के दौरान कुल ब्याज का भुगतान काफी कम हो जाता है। हालांकि, यह घरेलू बजट पर एक फिक्स्ड दबाव बनाता है, जो शिक्षा या मेडिकल जैसे अचानक आने वाले खर्चों के समय मुश्किल पैदा कर सकता है।

तीसरा विकल्प: पार्शियल प्रीपेमेंट (Partial Prepayment)

आजकल कई स्मार्ट कर्जदार 'पार्शियल प्रीपेमेंट' को बेहतर मान रहे हैं। इसमें आप अपनी बढ़ी हुई EMI को फिक्स करने के बजाय, जब भी आपके पास बोनस या अतिरिक्त फंड आए, तब सीधे मूलधन (Principal) का हिस्सा चुका सकते हैं। यह आपको बिना मासिक तनाव लिए ब्याज बचाने की आजादी देता है।

निवेशकों को सलाह है कि वे अपने होम लोन को एक स्थिर देनदारी न समझें। अपनी उम्र और आर्थिक स्थिति के हिसाब से फैसले लें। अगर आप युवा हैं, तो EMI बढ़ाकर कर्ज जल्दी खत्म करने की कोशिश करें, लेकिन अगर आप रिटायरमेंट के करीब हैं, तो कैश फ्लो को बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। साल में कम से कम एक बार अपने लोन का रिव्यू जरूर करें, ताकि ब्याज का बोझ बेकाबू न हो जाए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.