होम लोन की EMI जल्दी भरें या करें निवेश? जानें क्या है बेहतर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
होम लोन की EMI जल्दी भरें या करें निवेश? जानें क्या है बेहतर

फ्लोटिंग-रेट होम लोन वाले उधारकर्ताओं के लिए एक बड़ा सवाल है: क्या कर्ज़ जल्दी चुकाना बेहतर है या अतिरिक्त पैसे को निवेश करना? इसका जवाब आपकी लोन की वर्तमान स्थिति, बैंक के ब्याज दर और आपके जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करता है।

Detailed Coverage

होम लोन को जल्दी खत्म करें या बची हुई रकम को शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या अन्य जगह निवेश कर दें? यह सवाल अक्सर उन लोगों के मन में आता है जिनके होम लोन की ब्याज दरें फ्लोटिंग (बदलती रहने वाली) हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ब्याज दरों में बदलाव के साथ ही लोगों की EMI या लोन की अवधि बदल जाती है, और इसी के चलते यह दुविधा पैदा होती है।

लोन की 'उम्र' का महत्व

सबसे अहम बात यह है कि आप अपने होम लोन के सफर में कहां खड़े हैं। लोन के शुरुआती सालों में, आपकी EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज के रूप में जाता है। चूंकि ब्याज की गणना बकाया राशि के बड़े हिस्से पर होती है, इसलिए शुरुआत में ही एकमुश्त (lump-sum) भुगतान करने से आपको लंबी अवधि में अच्छी-खासी रकम की बचत हो सकती है। अगर आपका लोन नया है, तो ब्याज लागत में तुरंत कमी एक पक्का फायदा है, जिसे मार्केट से जुड़े निवेशों से हासिल करना अक्सर मुश्किल होता है।

निवेश बनाम कर्ज़ कम करना

जैसे-जैसे आप लोन की अवधि के अंत के करीब आते हैं, आपकी EMI का स्ट्रक्चर बदल जाता है। इस समय तक, आपकी EMI का अधिकांश हिस्सा मूलधन (principal) को कम करने में जाता है। चूंकि ब्याज का हिस्सा पहले से ही कम होता है, इसलिए इस स्टेज पर लोन जल्दी चुकाने से बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिलता। ऐसे में, यदि टैक्स के बाद मिलने वाला अनुमानित रिटर्न आपके होम लोन की ब्याज दर से ज़्यादा है, तो अतिरिक्त पैसे को निवेश करना ज़्यादा समझदारी हो सकता है। इक्विटी निवेश में भले ही मार्केट का जोखिम हो, लेकिन इनमें समय के साथ आपकी संपत्ति को बढ़ाने की क्षमता होती है, जबकि कम ब्याज वाले लोन को जल्दी चुकाने से एक निश्चित लेकिन छोटी बचत होती है।

प्रीपेमेंट से पहले ज़रूरी जांच

लोन को जल्दी चुकाने का फैसला करने से पहले, अपनी वित्तीय नींव को मज़बूत करना ज़रूरी है। इसका मतलब है कि आपके पास कम से कम छह महीने के खर्चों को कवर करने के लिए एक इमरजेंसी फंड (आपातकालीन निधि) होना चाहिए। अगर आपके पास यह सुरक्षा कवच नहीं है, तो अतिरिक्त पैसे को लोन प्रीपेमेंट में लगाने से आप आय के अचानक नुकसान की स्थिति में मुश्किल में पड़ सकते हैं। इसके अलावा, यह भी जांच लें कि क्या बैंक ने हाल की ब्याज दर कटौतियों का पूरा फायदा आप तक पहुंचाया है। एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े लोन की दरें अपने आप एडजस्ट हो जानी चाहिए, लेकिन अपने लेटेस्ट बैंक स्टेटमेंट पर अपनी वर्तमान ब्याज दर की जांच करना फायदेमंद है। कुछ बैंकों को इन दरों को अपडेट करने में समय लग सकता है, या वे इन्हें केवल विशिष्ट रीसेट डेट्स पर ही अपडेट कर सकते हैं।

भावनात्मक सुकून का रोल

वित्तीय फैसले सिर्फ गणित पर आधारित नहीं होते। कुछ लोग कर्ज-मुक्त होने में ज़्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं और पाते हैं कि होम लोन के मासिक बोझ से मुक्ति मिलने पर उन्हें काफी मानसिक सुकून मिलता है। वहीं, कुछ लोग कर्ज को मैनेज करने में सहज होते हैं, अगर इससे उन्हें ग्रोथ-ओरिएंटेड निवेशों में पैसा लगाने का मौका मिलता है। आपका फैसला आपके लंबे समय के लक्ष्यों और कर्ज रखने को लेकर आपकी व्यक्तिगत सहजता के स्तर के अनुरूप होना चाहिए। सबसे प्रभावी तरीका आमतौर पर प्रीपेमेंट से होने वाली निश्चित ब्याज बचत और लंबी अवधि के निवेश से संपत्ति बनाने की क्षमता के बीच संतुलन बनाना होता है, जबकि आपका इमरजेंसी फंड सुरक्षित रहे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.