बैंक आपको आपकी कमाई के आधे हिस्से से ज्यादा का कर्ज देने को तैयार हो सकते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो **₹1 लाख** की मंथली सैलरी पर EMI को **25-35%** तक ही सीमित रखना समझदारी है।
बैंक की पात्रता बनाम आपकी जेब का बजट
जब आप होम लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक आमतौर पर Fixed Obligation to Income Ratio (FOIR) का उपयोग करते हैं। इसके आधार पर बैंक आपकी नेट इनकम का 40% से 55% तक EMI में खर्च करने की अनुमति दे सकते हैं। हालांकि, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की राय इससे अलग है। वे सलाह देते हैं कि आपकी EMI आपकी टेक-होम सैलरी के 25% से 35% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
यदि आपकी मासिक सैलरी ₹1 लाख है, तो ₹25,000 से ₹35,000 की EMI आपके बजट के लिए सुरक्षित है। यह सीमा तय करने से आप अपने अन्य जरूरी खर्चों और SIP जैसे निवेशों के साथ तालमेल बिठा पाएंगे।
नजरअंदाज न करें 'छिपे हुए' खर्च
घर खरीदते समय लोग केवल EMI पर ध्यान देते हैं, जबकि अन्य जरूरी खर्चों को नजरअंदाज कर देते हैं। प्रॉपर्टी की कुल कीमत का 10% से 20% डाउन पेमेंट के लिए तैयार रखना जरूरी है। इसके अलावा, स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में आपको प्रॉपर्टी की कीमत का अतिरिक्त 5% से 8% खर्च करना पड़ सकता है। इन खर्चों को न जोड़ने पर लोन मिलने के बावजूद कैश की कमी हो सकती है।
फ्लोटिंग रेट्स और इमरजेंसी फंड का महत्व
भारत में ज्यादातर होम लोन फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट्स पर होते हैं। RBI या बैंकों द्वारा दरें बदलने पर आपकी EMI या लोन का समय बढ़ सकता है। यदि आपने बजट को अधिकतम सीमा तक खींचा है, तो ब्याज दरें बढ़ने पर आप मुश्किल में पड़ सकते हैं।
एक्सपर्ट्स की सलाह:
- लोन लेने से पहले 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड जरूर बनाएं।
- भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने पर अपनी क्षमता का 'स्ट्रेस टेस्ट' जरूर करें।
- खुद को 'हाउस-रिच' लेकिन 'कैश-पुअर' होने से बचाने के लिए लिक्विडिटी को प्राथमिकता दें।
