Home Buying: घर खरीदने का बना रहे हैं प्लान? डाउन पेमेंट के अलावा इन 'हिडन कॉस्ट' से हो सकते हैं कंगाल

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AuthorMehul Desai|Published at:
Home Buying: घर खरीदने का बना रहे हैं प्लान? डाउन पेमेंट के अलावा इन 'हिडन कॉस्ट' से हो सकते हैं कंगाल

पहली बार घर खरीदने वाले अक्सर प्रॉपर्टी की कीमत पर ध्यान देते हैं, लेकिन एक्स्ट्रा खर्च कुल बजट को **20%** तक बढ़ा सकते हैं। ओवर-लीवरेजिंग (Over-leveraging) से बचने के लिए इन छिपे हुए खर्चों को समझना बेहद जरूरी है।

अपना घर खरीदना जीवन का सबसे बड़ा फाइनेंशियल फैसला होता है। अक्सर खरीदार केवल डाउन पेमेंट की चिंता करते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि घर की कुल लागत प्रॉपर्टी की बेस प्राइस से 10% से 20% तक ज्यादा हो सकती है। अगर इन सेकेंडरी खर्चों का सही अनुमान न लगाया जाए, तो नए घर के मालिक भारी कर्ज या हाई-इंटरेस्ट वाले पर्सनल लोन के जाल में फंस सकते हैं।

स्टैंप ड्यूटी और सरकारी फीस का बोझ

प्रॉपर्टी खरीदते समय स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस अनिवार्य होती है, जो आपको अपनी बचत से ही देनी पड़ती है। प्रॉपर्टी की वैल्यू के आधार पर ये खर्च कुल कीमत का 4% से 10% तक हो सकते हैं। चूँकि होम लोन में अक्सर इन खर्चों को शामिल नहीं किया जाता, इसलिए घर में शिफ्ट होने से पहले ही आपकी लिक्विडिटी खत्म हो सकती है।

ओनरशिप के दौरान होने वाले खर्च

घर लेने के बाद भी कई ऐसे खर्च हैं जिन्हें लोग बजट बनाते समय नजरअंदाज कर देते हैं। इसमें प्रॉपर्टी टैक्स, हाउस इंश्योरेंस और हाउसिंग सोसाइटी के मेंटेनेंस चार्जेस शामिल हैं। यदि प्रॉपर्टी अंडर-कंस्ट्रक्शन है, तो देरी या अचानक बढ़ने वाले लेवी (Levies) के लिए भी तैयार रहना चाहिए। ये सभी खर्च आपके मंथली EMI के अलावा होते हैं।

फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी और रिस्क

सबसे बड़ा खतरा है ओवर-लीवरेजिंग। अगर आप डाउन पेमेंट बढ़ाने के चक्कर में अपनी सभी लॉन्ग-टर्म सेविंग्स खत्म कर देते हैं, तो इमरजेंसी बफर नहीं बचेगा। जानकारों का मानना है कि EMI आपकी मंथली इनकम के 30% से 35% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इससे ज्यादा होने पर इंटरेस्ट रेट बढ़ने या नौकरी जाने जैसी स्थिति में आप मुश्किल में पड़ सकते हैं।

यह हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर के लिए भी एक बड़ा पैरामीटर है। Home First Finance जैसी कंपनियां लोन अप्रूव करते समय इन रिस्क फैक्टर्स की बारीकी से जांच करती हैं। निवेशक के तौर पर यह समझना जरूरी है कि हाउसिंग कंपनियों की लोन बुक की क्वालिटी इस बात पर निर्भर करती है कि उनके ग्राहक अपने खर्चों और बजट को कैसे मैनेज करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.