₹50 लाख कमाने वालों के लिए रिटायरमेंट की नई गणित
₹50 लाख सालाना कमाने वाले हाई-अर्नर्स के लिए रिटायरमेंट फंड बनाने की स्ट्रेटेजी (Strategy) अब बदल रही है। वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) का वो पुराना आकर्षण, जो टैक्स-फ्री रिटर्न (Tax-free Returns) देता था, अब नए टैक्स नियमों के चलते कम होता दिख रहा है।
VPF के ₹2.5 लाख की लिमिट का चक्कर
नए टैक्स रिजीम (Tax Regime) के तहत, अगर आपकी सालाना सैलरी ₹50 लाख है, तो आपके एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) में अनिवार्य कंट्रीब्यूशन (Mandatory Contribution) ही करीब ₹3 लाख तक पहुंच सकता है। ऐसे में, ₹2.5 लाख प्रति वर्ष से ज्यादा के EPF कंट्रीब्यूशन पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल (Taxable) हो जाएगा। इसका मतलब है कि VPF में रिटायरमेंट सेविंग्स बढ़ाने वाले हाई-अर्नर को प्रोविडेंट फंड निवेश पर मिलने वाले पूरे टैक्स-फ्री फायदे से हाथ धोना पड़ सकता है।
कॉर्पोरेट NPS का बढ़ता दबदबा
इस टैक्स नियम ने VPF और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के बीच की गणना को बदल दिया है। VPF को हमेशा से सरकारी गारंटी, कम जोखिम वाले रिटर्न और टैक्स-फ्री निकासी के लिए पसंद किया जाता रहा है। लेकिन, जब एम्प्लॉई EPF कंट्रीब्यूशन ₹2.5 लाख की लिमिट पार कर जाता है, तो टैक्सेबल ब्याज VPF के नेट पोस्ट-टैक्स रिटर्न (Net Post-Tax Returns) को कम कर देता है।
इसके विपरीत, कॉर्पोरेट NPS एक अलग फायदा देता है। नए टैक्स रिजीम में, NPS में एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन पर सेक्शन 80CCD(2) के तहत टैक्स डिडक्शन (Tax Deduction) मिलता है, जिससे एम्प्लॉई अपनी टैक्सेबल इनकम (Taxable Income) को कम कर सकते हैं। यह सीधा टैक्स बेनिफिट (Tax Benefit) है जो VPF से उस तरह नहीं मिलता।
