त्योहारी सीजन में सोने-चांदी की खरीदारी के बाद अब टैक्स फाइलिंग की बारी है। Income-tax Act, 2025 के तहत फिजिकल गोल्ड, ETF और Sovereign Gold Bond पर टैक्स के नियम पूरी तरह बदल गए हैं, जिन्हें समझना हर निवेशक के लिए जरूरी है।
फिजिकल गोल्ड और सिल्वर का टैक्स गणित
अगर आप फिजिकल गोल्ड या सिल्वर में निवेश करते हैं, तो आपको 24 महीने से ज्यादा की होल्डिंग रखनी होगी ताकि आप लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) का लाभ उठा सकें। यदि आप इस अवधि से पहले इन्हें बेचते हैं, तो लाभ को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) माना जाएगा और यह आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होगा।
गोल्ड और सिल्वर ETF के नियम
Gold और Silver ETF के मामले में नियम अलग हैं। यहाँ 12 महीने से ज्यादा की होल्डिंग पर एसेट लॉन्ग-टर्म हो जाता है। लॉन्ग-टर्म होने पर इन पर 12.5% की दर से टैक्स लगता है। ध्यान रहे, इस नए टैक्स रिजीम में आपको इंडेक्सेशन (Indexation) का फायदा नहीं मिलेगा।
Sovereign Gold Bonds (SGB) का पेंच
SGB के मामले में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। अगर आप ओरिजिनल सब्सक्राइबर हैं और मैच्योरिटी तक बॉन्ड होल्ड करते हैं, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन, अगर आपने इन्हें सेकेंडरी मार्केट से खरीदा है, तो बेचने पर आपको 12.5% लॉन्ग-टर्म टैक्स देना होगा। इसके अलावा, SGB पर मिलने वाला सालाना ब्याज आपकी 'Income from other sources' में जोड़ा जाएगा, जो टैक्सेबल है।
अनुपालन और रिकॉर्ड्स (Compliance & Reporting)
टैक्स डिपार्टमेंट अब डिजिटली काफी सतर्क है। अपने सभी ट्रांजेक्शन को AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS से जरूर मिला लें। किसी भी तरह की विसंगति आपको इनकम टैक्स विभाग की जांच के घेरे में ला सकती है।
विरासत में मिले गोल्ड पर टैक्स
अगर आपको सोना विरासत (Inheritance) में मिला है, तो आपके लिए अच्छी खबर है। विरासत में मिले सोने के मामले में पिछली खरीद की तारीख और लागत (Cost of acquisition) को जोड़ा जाता है। यानी, अगर आपके पूर्वजों ने इसे लंबे समय तक रखा था, तो वह अवधि आपकी होल्डिंग में गिनी जाएगी, जिससे आपको लॉन्ग-टर्म टैक्स का फायदा मिल सकता है।
निवेशकों को सलाह है कि ITR-2 के Schedule CG में इन विवरणों को सही तरीके से भरें ताकि टैक्स रिटर्न भरते समय कोई कानूनी अड़चन न आए।
