Gold Investment Strategy: फेस्टिव सीजन में सोने की चमक फीकी, जानें पोर्टफोलियो रीबैलेंस करने का सही तरीका

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AuthorNeha Patil|Published at:
Gold Investment Strategy: फेस्टिव सीजन में सोने की चमक फीकी, जानें पोर्टफोलियो रीबैलेंस करने का सही तरीका

त्योहारी सीजन में सोने की खरीदारी करना हमारी परंपरा का हिस्सा है, लेकिन फाइनेंशियल प्लानर्स इसे इमोशनल बाइंग न बनाने की सलाह देते हैं। जनवरी के पीक से गोल्ड की कीमतों में **22%** की गिरावट आई है, ऐसे में निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड का हिस्सा **5-15%** तक ही सीमित रखना चाहिए और फिजिकल गोल्ड के बजाय डिजिटल विकल्पों पर विचार करना चाहिए।

भारत में त्योहारी सीजन आते ही सोने की खरीदारी में उछाल आना आम बात है। लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि सिर्फ भावनाओं में बहकर खरीदारी करना आपके लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन के लक्ष्यों को नुकसान पहुंचा सकता है। नवंबर 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो सोने की कीमतें जनवरी में ₹1,76,306 (प्रति 10 ग्राम) के अपने हाई लेवल से लगभग 22% गिरकर ₹1,37,626 के आसपास ट्रेड कर रही हैं। यह सही मौका है जब निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को रिव्यू करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे गोल्ड में ओवर-एक्सपोज्ड न हों।

पोर्टफोलियो में गोल्ड की सही मात्रा

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि गोल्ड आपके पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा नहीं, बल्कि एक 'स्टेबलाइजर' होना चाहिए जो महंगाई के खिलाफ हेज (Hedge) का काम करे। आदर्श रूप से, इसे आपके कुल पोर्टफोलियो का 5% से 15% ही होना चाहिए। यदि गोल्ड का एलोकेशन इस सीमा से अधिक हो जाता है, तो पोर्टफोलियो का बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे इक्विटी जैसे अन्य एसेट क्लास से मिलने वाला रिटर्न सीमित हो सकता है।

फिजिकल गोल्ड के छुपे हुए नुकसान

अगर आप पोर्टफोलियो में गोल्ड जोड़ना ही चाहते हैं, तो माध्यम का चुनाव सबसे जरूरी है। ज्वेलरी या सिक्के जैसे फिजिकल गोल्ड में मेकिंग चार्ज ही 6% से 25% तक हो सकते हैं, जिसका मतलब है कि आपका बड़ा हिस्सा सोने की असली वैल्यू के बजाय बेकार के खर्चों में चला जाता है। साथ ही, फिजिकल एसेट्स में चोरी और सुरक्षा का रिस्क हमेशा बना रहता है।

इसके मुकाबले, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और गोल्ड म्यूचुअल फंड्स बेहतर हैं, क्योंकि इनमें न तो मेकिंग चार्ज लगते हैं और न ही स्टोरेज का टेंशन। वहीं, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) अब नए नहीं मिल रहे, इसलिए अगर आपको इसमें निवेश करना है, तो सेकेंडरी मार्केट ही एकमात्र रास्ता है।

अन्य निवेश विकल्प

अगर आप सोने से इतर निवेश के जरिए स्टेबल इनकम चाहते हैं, तो रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) बेहतरीन विकल्प हैं। इनसे आप बिना प्रॉपर्टी खरीदे कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में हिस्सा ले सकते हैं।

8 नवंबर, 2026 को होने वाले मुहूर्त ट्रेडिंग (Muhurat Trading) से पहले निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे शॉर्ट-टर्म ट्रेंड्स के बजाय अपने रिस्क प्रोफाइल और लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल को ध्यान में रखकर ही फैसले लें, चाहे वो गोल्ड हो या डेट म्यूचुअल फंड्स।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.