नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, 2 फरवरी को Sovereign Gold Bonds (SGBs) में भारी बिकवाली हुई। इसकी कई सीरीज में 10% तक की गिरावट दर्ज की गई। उदाहरण के लिए, SGBDEC26 के भाव ₹1,760 गिरकर ₹15,840 पर आ गए, जबकि SGBSEP31II और SGBJAN27 भी 10% लुढ़ककर क्रमशः ₹14,575.77 और ₹14,296.50 पर बंद हुए।
टैक्स छूट के नियम में बदलाव बनी वजह
इस बड़ी गिरावट की जड़ Finance Bill 2026 में Sovereign Gold Bonds (SGBs) पर मिलने वाली Capital Gains Tax छूट में किया गया बदलाव है। पहले, जो निवेशक मैच्योरिटी (Maturity) तक बॉन्ड रखते थे, उन्हें टैक्स में छूट मिलती थी, चाहे उन्होंने बॉन्ड इश्यू (Issue) के समय खरीदे हों या सेकेंडरी मार्केट (Secondary Market) से। लेकिन 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए नियम के अनुसार, यह टैक्स छूट सिर्फ उन्हीं निवेशकों को मिलेगी जिन्होंने सीधे RBI से बॉन्ड खरीदे थे और मैच्योरिटी तक उन्हें अपने पास रखा। इसका सीधा मतलब है कि जो निवेशक सेकेंडरी मार्केट से SGBs खरीदते हैं, उन्हें बॉन्ड भुनाने (Redeem) पर होने वाले मुनाफे पर अब टैक्स देना होगा। सरकार का इरादा सीधे खरीदारों (Primary Investors) को फायदा पहुंचाना है, न कि सेकेंडरी मार्केट से आर्बिट्रेज (Arbitrage) का मौका देना।
SGBs और मार्केट की हकीकत
Sovereign Gold Bonds (SGBs) RBI द्वारा जारी किए जाते हैं और ये फिजिकल गोल्ड रखने का एक बेहतरीन विकल्प हैं। इनमें सोने की कीमतों का फायदा तो मिलता ही है, साथ ही 2.5% सालाना का एक निश्चित ब्याज भी मिलता है, जिसका भुगतान छमाही (Semi-annually) होता है। इन बॉन्ड्स की मैच्योरिटी 8 साल की होती है, जिसमें 5 साल बाद जल्दी निकलने का विकल्प भी रहता है। स्टॉक एक्सचेंज पर इनकी ट्रेडिंग (Trading) भी हो सकती है। टैक्स छूट के इस नए नियम से पहले, मैच्योरिटी तक रखने पर मिलने वाली टैक्स-फ्री छूट के कारण सेकेंडरी मार्केट में इनकी काफी ट्रेडिंग होती थी, और कुछ पुराने बॉन्ड्स प्रीमियम पर भी ट्रेड कर रहे थे।
आगे क्या होगा SGB निवेशकों के लिए?
टैक्स के इस बदले हुए ढांचे से निवेशकों की SGBs को लेकर रणनीति पर असर पड़ना तय है। अब, सीधे खरीदे गए बॉन्ड्स पर ही टैक्स-फ्री मुनाफे का लाभ मिलेगा। इससे सेकेंडरी मार्केट में SGBs की मांग कम हो सकती है और कीमतों में और भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि SGBs अभी भी सोने की कीमतों का एक्सपोजर (Exposure), ब्याज आय और स्टोरेज की झंझट से मुक्ति जैसे फायदे दे रहे हैं, लेकिन सभी होल्डर्स के लिए मैच्योरिटी तक टैक्स छूट खत्म होने से इनका निवेश का आकर्षण कुछ हद तक कम हो गया है।