एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत की Gen Z जनरेशन (युवा पीढ़ी) ने 'सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान' (SIP) और म्यूचुअल फंड में निवेश के ज़रिए अपनी दौलत बढ़ाना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में 51% Gen Z के SIP में निवेश करने की बात कही गई है। लेकिन, चिंता की बात यह है कि ये युवा हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) को टाल रहे हैं। इस वजह से 65% युवा मेडिकल खर्चों के लिए बड़े वित्तीय जोखिम में हैं।
Gen Z का नया फाइनेंसियल ट्रेंड
बजाज कैपिटल इंश्योरेंस ब्रोकर्स (BajajCapital Insurance Broking) की एक नई रिपोर्ट ने भारत की युवा पीढ़ी के फाइनेंसियल बर्ताव को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां 51% युवा 'सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान' (SIP) और म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में पैसा लगा रहे हैं, वहीं हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) लेने में वे काफी पीछे हैं। कई युवा इसे 30 की उम्र पार करने या जीवन की बड़ी उपलब्धियों के बाद लेने वाली चीज़ मान रहे हैं, जबकि यह एक ज़रूरी वित्तीय सुरक्षा कवच है।
हेल्थ इंश्योरेंस के बिना बड़ा जोखिम
इस ट्रेंड के कारण निवेशकों और युवा वयस्कों के लिए एक बड़ा खतरा पैदा हो गया है। रिपोर्ट बताती है कि 65% Gen Z के लोग किसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में वित्तीय रूप से बेहद कमजोर हैं। 35% युवा अपने एम्प्लॉयर (Employer) या पेरेंट्स (Parents) के हेल्थ कवर पर निर्भर हैं, लेकिन बाकी बड़ी संख्या में युवा अपनी सेविंग (Savings) खर्च करने, लोन (Loan) लेने या फिर अपने निवेश को बेचने पर मजबूर हो सकते हैं। यह सीधे तौर पर उनके दौलत बनाने के लक्ष्य के विपरीत है, क्योंकि इमरजेंसी मेडिकल बिल सालों की मेहनत की कमाई को खत्म कर सकते हैं।
ऑनलाइन जानकारी, पर एक्शन नहीं
रिसर्च (Research) से पता चलता है कि Gen Z के बीच डिजिटल जानकारी और असल वित्तीय एक्शन में एक बड़ा गैप है। 29% युवा फाइनेंसियल ऐप (Financial App) का इस्तेमाल करते हैं और 26% ऑनलाइन इंफ्लुएंसर्स (Online Influencers) से सलाह लेते हैं। लेकिन, यह जानकारी हमेशा पॉलिसी खरीदने में नहीं बदल पाती। "एक्टिवेशन प्रॉब्लम" (Activation Problem) से पता चलता है कि भले ही जानकारी आसानी से उपलब्ध हो, पर इंश्योरेंस के बारे में जानने से लेकर उसे खरीदने तक का कदम अक्सर अधूरा रह जाता है।
इंश्योरेंस सेक्टर के लिए मायने
यह बर्ताव भारतीय इंश्योरेंस सेक्टर (Insurance Sector) के लिए एक अहम बात है। इंश्योरेंस कंपनियां युवाओं को टारगेट करने के लिए लगातार डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि जागरूकता और पॉलिसी खरीदने के बीच के गैप को भरा जा सके। कंपनियों के लिए चुनौती सिर्फ ग्राहक तक पहुंचना नहीं, बल्कि उस सोच को बदलना भी है कि इंश्योरेंस जवानी के बाद की चीज़ है। सेक्टर के निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या नए, सरल और डिजिटल-फर्स्ट प्रोडक्ट इस युवा पीढ़ी को लंबे समय तक पॉलिसीधारक बना पाते हैं या नहीं।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
इंश्योरेंस और फाइनेंसियल सर्विसेज़ सेक्टर (Financial Services Sector) पर नज़र रखने वाले निवेशकों को डिजिटल लीड्स (Digital Leads) के पॉलिसी में बदलने की दर पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, कंपनियों को Gen Z की सोच के हिसाब से अपने प्रोडक्ट डिजाइन को कैसे बदलना पड़ता है, यह भी देखना ज़रूरी होगा। इसके अलावा, युवा कमाई करने वाले लोग वेल्थ-बिल्डिंग एसेट्स (Wealth-building assets) जैसे म्यूचुअल फंड और रिस्क-मिटिगेशन एसेट्स (Risk-mitigation assets) जैसे इंश्योरेंस के बीच कैसे संतुलन बनाते हैं, यह देखना भी इस जनरेशन के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत होगा।
