मार्केट एक्सपर्ट्स ने नई पीढ़ी के निवेशकों को 'हर्ड मेंटालिटी' (herd mentality) और FOMO से बचने की सलाह दी है। साल 2026 में Sensex और Nifty में आई **14-15%** की गिरावट के बीच, बिना रिसर्च के निवेश करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
भारत के युवा निवेशकों में आजकल बिना सोचे-समझे और सट्टा लगाने जैसी ट्रेडिंग का चलन तेजी से बढ़ा है, जो मार्केट दिग्गजों के लिए चिंता का विषय बन गया है। हाल ही में 'Business Standard BFSI Insight Summit' में एक्सपर्ट्स ने साफ कहा कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के प्रभाव में आकर शेयर बाजार को 'कैसीनो' समझना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है।
इन्फ्लुएंसर-लेड निवेश का जोखिम
युवा निवेशक अब पारंपरिक वित्तीय संस्थानों के बजाय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की सलाह पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। ये इन्फ्लुएंसर्स अक्सर 'क्विक रिटर्न' का झांसा देकर लोगों को क्रिप्टो या बेहद रिस्की स्टॉक्स की तरफ धकेल देते हैं। बिना फंडामेंटल एनालिसिस के लिया गया यह फैसला बाजार के रुख बदलते ही निवेशकों को भारी मुसीबत में डाल सकता है।
बाजार की पहली बड़ी अग्निपरीक्षा
अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो Sensex और Nifty में साल-दर-साल (YTD) आधार पर लगभग 14-15% की गिरावट दर्ज की गई है। उन निवेशकों के लिए यह स्थिति कठिन है, जिन्होंने केवल तेजी के दौर में मार्केट में एंट्री ली थी। अनुभवी निवेशकों का मानना है कि यह गिरावट कोई असामान्य घटना नहीं, बल्कि आर्थिक चक्र का एक हिस्सा है, लेकिन नए निवेशकों के लिए यह अपने धैर्य की परीक्षा लेने का समय है।
'टाइमिंग' के चक्कर में गंवा रहे मौके
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मार्केट को 'टाइम' करने (मार्केट के उतार-चढ़ाव के हिसाब से खरीदारी-बिक्री) की कोशिश निवेशकों को लॉन्ग-टर्म वेल्थ बनाने से रोकती है। वे सलाह देते हैं कि ऐसे करेक्शन के दौर में अच्छी क्वालिटी वाले एसेट्स को सस्ते दाम पर खरीदने का मौका देखना चाहिए। SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए निवेश करना ही बाजार की अस्थिरता को मात देने का सबसे कारगर तरीका बना हुआ है।
रेगुलेटरी सख्ती और सही कदम
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) भी अब फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर्स पर लगाम कसने के लिए कड़े कदम उठा रहा है ताकि रिटेल निवेशकों को गलत सलाह से बचाया जा सके। निवेशकों को नसीहत दी जाती है कि वे शॉर्ट-टर्म ट्रेंड्स के बजाय अपने लॉन्ग-टर्म गोल्स पर ध्यान केंद्रित करें और सोशल मीडिया की भीड़ से दूर रहकर ठोस रिसर्च को प्राथमिकता दें।
