भारत की नई पीढ़ी यानी Gen Z में 'Buy Now, Pay Later' (BNPL) का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। इस आसान क्रेडिट के चक्कर में युवा अपनी लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन यानी SIP के पैसे को दांव पर लगा रहे हैं, जिससे भविष्य में फाइनेंशियल अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।
डिजिटल क्रेडिट प्रोडक्ट्स ने आज की युवा पीढ़ी के लिए लाइफस्टाइल खर्चों को तो आसान बना दिया है, लेकिन बचत की आदत पर गहरा प्रहार किया है। शेयर बाजार में रिटेल पार्टिसिपेशन का आंकड़ा तो बढ़ रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि एक बड़ा वर्ग अब 'Immediate Gratification' यानी तुरंत मिलने वाली खुशी को फाइनेंशियल स्टेबिलिटी से ऊपर रख रहा है। BNPL प्लेटफॉर्म्स के कारण युवाओं को अपनी जेब में 'नकली डिस्पोजेबल इनकम' का अहसास होता है, जो उन्हें महंगे कर्ज के जाल में धकेल देता है।\n\nएक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि क्रेडिट की असली कीमत सिर्फ प्रोडक्ट की कीमत नहीं, बल्कि उस पर चुकाया जाने वाला ब्याज है। क्रेडिट कार्ड और BNPL जैसे अनसिक्योर्ड लोन की ब्याज दरें अक्सर शेयर बाजार से मिलने वाले लॉन्ग-टर्म रिटर्न्स से कहीं ज्यादा होती हैं। जैसे ही फाइनेंशियल प्रेशर आता है, युवा निवेशक अपनी SIP बंद करने या निवेश को बीच में ही तोड़ने लगते हैं।\n\nबाजार के नजरिए से देखें तो यह रिटेल पार्टिसिपेशन की क्वालिटी के लिए बड़ा रिस्क है। SIP का फायदा तभी मिलता है जब आप बाजार के उतार-चढ़ाव में टिके रहें। पोर्टफोलियो को अपने खर्चों का जरिया बनाना या कर्ज चुकाने के लिए उसे लिक्विडेट करना कंपाउंडिंग की पूरी ताकत को खत्म कर देता है।\n\nवेल्थ क्रिएशन के लिए 'ऑर्डर ऑफ ऑपरेशंस' का सही होना जरूरी है। पहले अपना इमरजेंसी फंड बनाएं और जरूरी कर्ज चुकाएं, उसके बाद ही लाइफस्टाइल पर खर्च करें। अगर आप अपना Debt-to-Income रेश्यो कंट्रोल में नहीं रखेंगे, तो लॉन्ग-टर्म के अपने फाइनेंशियल गोल्स से दूर होते जाएंगे। याद रखें, छोटी-छोटी खुशियों के लिए भविष्य की बड़ी दौलत को कुर्बान करना आपकी सबसे बड़ी फाइनेंशियल गलती हो सकती है।
