GIFT City: एशियन मार्केट में निवेश का 'महंगा' रास्ता, भारतीय निवेशकों को भारी कीमत

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AuthorNeha Patil|Published at:
GIFT City: एशियन मार्केट में निवेश का 'महंगा' रास्ता, भारतीय निवेशकों को भारी कीमत
Overview

भारतीय निवेशक एशियाई बाजारों में डायवर्सिफिकेशन के लिए GIFT City का रुख कर रहे हैं, लेकिन इस रास्ते पर उन्हें ऊंची शुरुआती लागतों, जैसे कि **20%** टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) और महंगे फंड्स का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, निवेश के विकल्प भी सीमित हैं।

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एशियाई बाजारों, जैसे ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान और चीन में निवेश का रास्ता तलाश रहे भारतीय निवेशकों के लिए GIFT City एक अहम जरिया है। लेकिन, इस रास्ते पर चलने की 'कीमत' यानी लागत काफी ज्यादा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से ओवरसीज म्यूचुअल फंड निवेश पर $7 अरब की कैप के चलते, निवेशक Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत प्रति वर्ष $250,000 तक के निवेश के लिए GIFT City का इस्तेमाल कर रहे हैं। मगर, ₹10 लाख से अधिक की रकम भेजने पर 20% का भारी टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) देना पड़ता है, जिससे निवेश की एक बड़ी रकम शुरुआती दौर में ही अटक जाती है।

इसके अलावा, GIFT City में उपलब्ध फंड्स के एनुअल एक्सपेंस रेश्यो (annual expense ratio) भी अक्सर 1.5% से 3.5% तक होते हैं, जो कि कुछ खास तरह के Alternative Investment Funds (AIFs) के लिए और भी ज्यादा हो सकते हैं। ये लागतें सीधे घरेलू इंडेक्स फंड या भारतीय फीडर फंड की तुलना में काफी ज्यादा हैं, जो बताते हैं कि सुविधा के लिए निवेशकों को अच्छी-खासी कीमत चुकानी पड़ रही है।

वैसे तो सीधे विदेशी ब्रोकर्स के जरिए निवेश करने पर डॉक्यूमेंटेशन, फॉरेन एक्सचेंज कॉस्ट और ब्रोकरेज फीस जैसी परेशानियां आती हैं। लेकिन, GIFT City भारतीय नियमों के तहत एक फाइनेंशियल हब की तरह काम करता है, जिससे भारतीय निवासियों के लिए नियमों का पालन करना आसान हो जाता है। पीआईएस (PIS) अकाउंट की जरूरत नहीं पड़ती और एनआरआई (NRI) के लिए टैक्स फाइलिंग भी सुगम हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, DSP Global Equity Fund, जो GIFT City के जरिए उपलब्ध है, उसका एक्सपेंस रेश्यो 1.75% तक है और 24 महीने के भीतर रिडेम्पशन पर 1% का एग्जिट लोड भी है। हालांकि, कुछ टैक्स छूटें जैसे मैनेजमेंट फीस पर कोई जीएसटी (GST) नहीं, कोई सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) नहीं और कुछ रिडेम्पशन पर कोई टीडीएस (TDS) नहीं, इन फायदों से कुल लागत कुछ हद तक कम हो सकती है, खासकर उन एनआरआई के लिए जिनके देश में कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता।

लेकिन, इन फायदों के बावजूद, GIFT City मार्ग में बड़े रिस्क भी हैं। ₹10 लाख से ऊपर की रेमिटेंस पर 20% TCS शुरुआती पूंजी पर भारी दबाव डालता है। वहीं, कई GIFT City फंडों के एक्सपेंस रेश्यो 2% से 3.5% तक होते हैं, जो घरेलू इंडेक्स फंडों (0.1%-0.5%) या एक्टिवली मैनेज्ड इंडियन इक्विटी फंडों (0.5%-1.5%) से कहीं ज्यादा हैं। निवेश विकल्पों की सीमित रेंज भी एक बड़ी कमी है, खासकर ग्लोबल मार्केट में उपलब्ध शेयरों और ईटीएफ (ETFs) की तुलना में। पैसिव फॉरेन इन्वेस्टमेंट कंपनी (PFIC) नियमों जैसे टैक्स से जुड़े पेचीदा मामले भी कुछ एनआरआई के लिए टैक्स देनदारी बढ़ा सकते हैं।

भविष्य को देखते हुए, GIFT City में आईएफएससी (IFSC) एंटिटीज के लिए टैक्स हॉलिडे (tax holidays) और वित्तीय बुनियादी ढांचे का विस्तार इसकी ग्रोथ को बढ़ा सकता है। आखिरकार, GIFT City की अहमियत इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह सीधे ग्लोबल निवेश की तुलना में बेहतर लागत-लाभ अनुपात प्रदान करता है। यह वैश्विक एक्सपोजर के लिए एक रेगुलेटेड चैनल तो है, पर निवेशकों को इसकी असली कीमत समझने के लिए सभी छुपी हुई लागतों का हिसाब लगाना होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.