अगर आप अपने बच्चों के लिए विदेश में प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं, तो RBI के LRS नियमों के तहत सालाना **$250,000** की सीमा का ध्यान रखना जरूरी है। इसके अलावा, **20%** TCS और इनकम टैक्स विभाग को विदेशी संपत्ति की जानकारी देना अनिवार्य है।
LRS और प्रॉपर्टी का गणित\n\nविदेश में बसे अपने बच्चों के लिए घर खरीदना कई भारतीय परिवारों का सपना होता है, लेकिन इसे पूरा करने के लिए Reserve Bank of India (RBI) की Liberalised Remittance Scheme (LRS) के दायरे में रहना पड़ता है। LRS के तहत एक भारतीय नागरिक हर फाइनेंशियल ईयर में अधिकतम $250,000 भेज सकता है।\n\nमहत्वपूर्ण बात यह है कि यह लिमिट प्रति व्यक्ति है, न कि प्रति परिवार। अक्सर अभिभावक फंड्स को जोड़कर बड़ी प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं, लेकिन यह तभी संभव है जब आप और आपके बच्चे संयुक्त (Joint) मालिक हों। अगर प्रॉपर्टी सिर्फ बच्चे के नाम पर है, तो एक पेरेंट अधिकतम $250,000 ही भेज सकता है।\n\n### 20% TCS का असर\n\nलेन-देन करते समय Tax Collected at Source (TCS) को नजरअंदाज न करें। यदि आपका रेमिटेंस एक फाइनेंशियल ईयर में ₹10 लाख से ज्यादा है, तो सरकार 20% TCS काटती है। यह पैसा हालांकि आपकी टैक्स लायबिलिटी के खिलाफ एडजस्ट हो सकता है, लेकिन यह आपके हाथों में मौजूद लिक्विडिटी (Liquidity) को कम कर देता है, इसलिए आपको एक्स्ट्रा कैश का इंतजाम रखना होगा।\n\n### टैक्स फाइलिंग में सावधानी\n\nप्रॉपर्टी खरीदने के बाद आपकी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। आपको अपने इनकम टैक्स रिटर्न में 'Schedule FA' (Foreign Assets) के तहत इस संपत्ति का खुलासा करना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर 'Black Money Act' के तहत भारी जुर्माना लग सकता है।\n\nइसके अलावा, करेंसी में उतार-चढ़ाव और उस देश के स्थानीय कानून भी आपके बजट को प्रभावित कर सकते हैं। किसी भी कदम को उठाने से पहले अपने Authorized Dealer बैंक से परामर्श लें ताकि आप FEMA गाइडलाइंस के साथ पूरी तरह अनुपालन (Compliance) सुनिश्चित कर सकें।