अगर आप विदेशी शेयरों (Foreign Stocks) में निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। भारतीय निवेशकों को मिलने वाली ₹1.25 लाख की सालाना LTCG टैक्स छूट का फायदा अब केवल घरेलू इक्विटी तक सीमित है, विदेशी शेयरों पर कोई छूट नहीं मिलेगी।
भारतीय निवेशक जो अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए विदेशी शेयरों का सहारा लेते हैं, उन्हें अब टैक्स नियमों में इस बड़े बदलाव को समझना होगा। घरेलू इक्विटी के विपरीत, विदेशी शेयरों पर निवेश के लिए ₹1.25 लाख की सालाना LTCG छूट उपलब्ध नहीं है।
क्यों नहीं मिल रही छूट?
इस अंतर का मुख्य कारण 'सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स' (STT) है। घरेलू बाजार में ₹1.25 लाख की छूट केवल उन्हीं शेयरों या इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स पर मिलती है जिन पर भारतीय एक्सचेंजों में STT का भुगतान किया गया हो। चूँकि विदेशी शेयर विदेशी एक्सचेंजों पर लिस्टेड होते हैं और उन पर भारतीय STT नहीं लगता, इसलिए वे इस टैक्स बेनिफिट के दायरे से बाहर हैं।
टैक्स का गणित
अगर आप विदेशी शेयरों को 24 महीने से ज्यादा समय के लिए होल्ड करते हैं, तो होने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पर 12.5% का टैक्स देना होगा। यह टैक्स पहले रुपये से ही लागू होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि आपने विदेशी शेयरों से ₹1 लाख का मुनाफा कमाया है, तो उस पूरे मुनाफे पर आपको टैक्स चुकाना होगा, जबकि भारतीय शेयरों में यह रकम टैक्स-फ्री होती।
वहीं, 24 महीने से कम समय के लिए रखे गए शेयरों को 'शॉर्ट-टर्म' माना जाएगा और उन पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।
अनुपालन (Compliance) में चुनौतियां
विदेशी पोर्टफोलियो के साथ एडमिनिस्ट्रेटिव बोझ भी बढ़ जाता है। निवेशकों को खरीदारी और बिक्री की कीमत को विदेशी करेंसी में ट्रैक करना होगा और फिर उसे रुपये में बदलना होगा। साथ ही, इनकम टैक्स रिटर्न में 'Schedule FA' (Foreign Assets) के तहत इनका खुलासा करना अनिवार्य है। यदि आप इसे सही ढंग से रिपोर्ट नहीं करते हैं, तो आपको नियामक जांच (Regulatory Scrutiny) का सामना करना पड़ सकता है। फॉरेन टैक्स क्रेडिट (FTC) क्लेम करने की प्रक्रिया भी काफी जटिल है, इसलिए अपने ब्रोक्रेज स्टेटमेंट्स और ट्रेड कन्फर्मेशन को संभाल कर रखना बेहद जरूरी है।
