1 जुलाई 2026 से Reserve Bank of India ने क्रेडिट रिपोर्टिंग को वीकली कर दिया है, जिससे अब महीने में 4 बार आपका क्रेडिट स्कोर बदल सकता है। इस बदलाव के चलते गलतियों के कारण लोन रिजेक्ट होने का खतरा बढ़ गया है, लेकिन अब 30 दिन में समाधान न मिलने पर आपको हर दिन का **₹100** मुआवजा भी मिल सकता है।
Reserve Bank of India (RBI) ने क्रेडिट रिपोर्टिंग साइकिल में बड़ा बदलाव किया है, जिसका सीधा असर हर कर्ज लेने वाले पर पड़ेगा। 1 जुलाई 2026 से लागू इस नियम के तहत, लेंडर्स को महीने की 9, 16, 23 और आखिरी तारीख को डेटा रिपोर्ट करना अनिवार्य है। इसका मतलब है कि आपका क्रेडिट स्कोर अब स्टेटिक नहीं, बल्कि डायनामिक हो गया है।
गलतियों का रिस्क और लोन रिजेक्शन
रिपोर्टिंग की रफ्तार बढ़ने के साथ ही गलतियों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अगर आपकी रिपोर्ट में कोई गलत एंट्री है—जैसे कि समय पर भुगतान के बावजूद 'लेट पेमेंट' दिखाना—तो यह तुरंत आपके स्कोर को खराब कर देगी। बैंकों के ऑटोमेटेड सिस्टम आपकी एप्लीकेशन को बिना किसी मानवीय जांच के सीधे रिजेक्ट कर सकते हैं, इसलिए अब सावधानी बरतना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है।
30 दिन में समाधान या मुआवजा
RBI ने ग्राहकों के अधिकारों को मजबूत करते हुए एक स्पष्ट ग्रीवांस रिड्रेसल (Grievance Redressal) ढांचा तैयार किया है। अगर आप CIBIL, Experian, Equifax या CRIF High Mark जैसे ब्यूरो के जरिए शिकायत करते हैं, तो लेंडर के पास जांच के लिए 21 दिन और ब्यूरो के पास अपडेट के लिए 9 दिन का समय होगा।
यदि 30 दिन के भीतर आपकी शिकायत का निपटारा नहीं होता है, तो आप हर दिन की देरी के लिए ₹100 के मुआवजे के हकदार होंगे। इस मुआवजे को पाने के लिए अपने सभी रिफरेंस नंबर और सबमिशन तारीखों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
कैसे बचें परेशानी से?
सिर्फ लोन लेते समय क्रेडिट रिपोर्ट चेक करने की पुरानी आदत छोड़नी होगी। अब आपको कम से कम हर तिमाही (Quarter) अपनी रिपोर्ट की ऑडिट करनी चाहिए। पुराने बंद हो चुके लोन अकाउंट्स, गलत पर्सनल डिटेल्स या डुप्लिकेट एंट्रीज की तुरंत पहचान करें और उनका पेपर ट्रेल साथ रखें। याद रखें, साप्ताहिक अपडेट के कारण सुधारी गई जानकारी भी अब सिस्टम में बहुत तेजी से रिफ्लेक्ट होगी, जो आपके लोन अप्रूवल की राह आसान बना सकती है।
