फाइनेंशियल एजुकेटर Rachana Ranade ने महिलाओं को सलाह दी है कि वे पारंपरिक बचत से आगे बढ़कर एक्टिव डीमैट (Demat) इन्वेस्टिंग पर ध्यान दें। उन्होंने करियर ब्रेक के लिए इमरजेंसी फंड और एसेट मैनेजमेंट की अहमियत बताई है।
पारंपरिक बचत की आदतों से आधुनिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट की ओर कदम बढ़ाना हर परिवार के लिए एक बड़ा बदलाव है। आज भी कई घरों में पैसा या तो कैश में रखा जाता है या फिर कम ब्याज वाले सेविंग्स अकाउंट्स में, जिसे अक्सर 'डब्बा सेविंग्स' कहा जाता है। हालांकि यह सुरक्षित लगता है, लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स जैसे Rachana Ranade का मानना है कि लंबी अवधि में वेल्थ बनाने के लिए डीमैट अकाउंट के जरिए एक्टिव मार्केट पार्टिसिपेशन बेहद जरूरी है।
'बाय एंड रिव्यू' का महत्व
ज्यादातर निवेशक 'बाय एंड होल्ड' के पुराने नियम पर चलते हैं, जो बदलते मार्केट में सुस्ती ला सकता है। इसकी जगह 'बाय एंड रिव्यू' (Buy and Review) की रणनीति अपनानी चाहिए। इसमें तिमाही नतीजों (Earnings Reports), कंपनी के ऑपरेशंस और मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखना शामिल है। आज के डिजिटल दौर में उपलब्ध टूल्स की मदद से आम निवेशक भी कॉर्पोरेट फाइलिंग्स और परफॉरमेंस मैट्रिक्स को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
लाइफ-स्टेज और इमरजेंसी फंड
महिलाओं के लिए फाइनेंशियल सिक्योरिटी का मतलब है जीवन के अलग-अलग चरणों की योजना बनाना, जैसे कि मैटरनिटी लीव के दौरान करियर में ब्रेक। प्लानिंग में यह सलाह दी जाती है कि कम से कम 1 साल के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड जरूर बनाएं। यह सुरक्षा कवच सुनिश्चित करता है कि आय रुकने या कम होने पर भी आपके फाइनेंशियल गोल्स पर कोई आंच न आए।
एसेट मैनेजमेंट का अनुशासन
वेल्थ मैनेजमेंट केवल सही शेयर चुनने का नाम नहीं है, बल्कि यह व्यवस्थित रहने की कला है। कई बार इमरजेंसी के समय सही जानकारी न होने से काफी परेशानी होती है। इसलिए सभी एसेट्स का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड रखना चाहिए। इसमें नॉमिनी की जानकारी अपडेट करना और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट प्रोटोकॉल सेट करना सबसे जरूरी कदम है। अपनी इन्वेस्टमेंट जर्नी को आधुनिक बनाने का सबसे आसान तरीका है अपने पोर्टफोलियो को लगातार रिव्यू करना और यह सुनिश्चित करना कि सभी अकाउंट्स में नॉमिनेशन पूरी तरह अपडेटेड हों।
