त्योहारी सीजन में मिलने वाले 'No-Cost' EMI और BNPL ऑफर्स दिखने में तो आसान लगते हैं, लेकिन इनमें प्रोसेसिंग फीस और कैश डिस्काउंट का नुकसान छिपा होता है। खरीदारी से पहले मंथली इंस्टॉलमेंट के बजाय कुल पेमेंट की गणना करना जरूरी है, वरना आपको ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं।
त्योहारी सीजन के दौरान रिटेलर्स क्रेडिट-आधारित पेमेंट जैसे 'No-Cost EMI' और 'Buy Now, Pay Later' (BNPL) को जोर-शोर से प्रमोट करते हैं। ये विकल्प तुरंत खरीदारी की सहूलियत तो देते हैं, लेकिन इनमें शुल्कों का एक ऐसा चक्रव्यूह होता है जो सामान की फाइनल कीमत को बढ़ा देता है। छोटी-छोटी किस्तों के जाल में फंसकर आप यह भूल जाते हैं कि वास्तव में आप उधार के लिए कितनी बड़ी कीमत चुका रहे हैं।
No-Cost EMI कैसे काम करता है?
जब कोई मर्चेंट 'No-Cost EMI' ऑफर देता है, तो वह ब्याज के खर्च को किसी न किसी तरह से कवर करता है। अक्सर, जो कैश डिस्काउंट आपको नकद खरीदारी पर मिल सकता था, उसे EMI चुनते ही हटा दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी प्रोडक्ट पर 5% का कैश डिस्काउंट मिल रहा है, तो 'No-Cost EMI' लेने पर वह डिस्काउंट खत्म हो जाता है। यानी, आप ब्याज का पैसा अपनी जेब से उस डिस्काउंट को छोड़कर भर रहे होते हैं। खरीदारी से पहले हमेशा EMI प्लान की कुल राशि और डिस्काउंटेड कीमत की तुलना जरूर करें।
प्रोसेसिंग फीस और टैक्स का असर
ब्याज के अलावा, बैंक और NBFCs ट्रांजेक्शन को EMI में बदलने के लिए प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं। इसमें 18% GST भी जोड़ा जाता है। भले ही ब्याज दर 0% क्यों न हो, प्रोसेसिंग शुल्क और GST मिलकर आपके बिल को बढ़ा देते हैं।
BNPL के जोखिम और क्रेडिट स्कोर
BNPL सर्विस एक शॉर्ट-टर्म लोन की तरह है। यदि आप पेमेंट में चूक करते हैं, तो भारी पेनल्टी देनी पड़ सकती है। इसके अलावा, बार-बार BNPL का उपयोग करने से आपके क्रेडिट रिपोर्ट पर 'हार्ड इंक्वायरी' होती है, जो आपके CIBIL स्कोर को खराब कर सकती है। भविष्य में होम या कार लोन लेने के लिए आपका अच्छा क्रेडिट स्कोर होना बेहद जरूरी है।
बजट पर काबू कैसे रखें?
त्योहारों की चमक-धमक में यह ध्यान रखना मुश्किल हो जाता है कि छोटे-छोटे EMI का बोझ आपके मंथली कैश फ्लो पर कितना दबाव डाल रहा है। अपनी बचत को सुरक्षित रखने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि चेकआउट करने से पहले सभी पेनल्टी और हिडन चार्जेस जोड़कर 'टोटल रीपेमेंट' की गणना करें। मंथली फिगर के झांसे में आने के बजाय, हमेशा कुल लागत पर नजर रखें ताकि आपका फाइनेंशियल बजट बिगड़ने न पाए।
