फेस्टिव सेल के दौरान डिजिटल पेमेंट फ्रॉड का खतरा काफी बढ़ जाता है। निवेशकों को न केवल शॉपिंग के दौरान बल्कि इन्वेस्टमेंट ऐप्स से जुड़े बैंक अकाउंट्स की सुरक्षा को लेकर भी बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।
भारत में फेस्टिव सीजन के दौरान डिजिटल ट्रांजेक्शन में भारी उछाल आता है। जहां ग्राहक डिस्काउंट और ऑफर्स की तलाश में रहते हैं, वहीं साइबर अपराधी इस भीड़ का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। निवेशकों के लिए खतरा सिर्फ शॉपिंग के दौरान होने वाली धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि सबसे बड़ा रिस्क उन बैंक अकाउंट्स का है जो ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट्स से लिंक होते हैं।
फाइनेंशियल अकाउंट्स की सुरक्षा
ज्यादातर रिटेल निवेशक अपने प्राइमरी सेविंग्स अकाउंट्स को कई इन्वेस्टमेंट ऐप्स से जोड़कर रखते हैं। यदि कोई हमलावर फिशिंग लिंक या किसी अन्य तरीके से आपके क्रेडेंशियल्स चुरा लेता है, तो आपका पूरा निवेश दांव पर लग सकता है। किसी भी लुभावने डिस्काउंट वाले ईमेल या सोशल मीडिया विज्ञापन पर आने वाले संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक करने से बचें।
पेमेंट रिस्क को समझें
डिजिटल पेमेंट में सुरक्षा के लिए यह जानना जरूरी है कि प्लेटफॉर्म कैसे काम करते हैं। एक कॉमन स्कैम में लोगों को यकीन दिलाया जाता है कि पैसे 'प्राप्त' (Receive) करने के लिए उन्हें अपना UPI PIN डालना होगा। याद रखें, UPI PIN सिर्फ पेमेंट भेजने के लिए होता है, उसे पाने के लिए नहीं। इसके अलावा, शॉपिंग के दौरान Tokenization जैसे सुरक्षित फीचर्स का इस्तेमाल करें, जो आपके असली कार्ड नंबर की जगह डिजिटल कोड का उपयोग करते हैं।
वेबसाइट की असलियत पहचानें
सिर्फ वेबसाइट के एड्रेस बार में दिखने वाले 'Padlock' आइकन या 'https' को देखकर उसे सुरक्षित न मान लें। ये सिर्फ एन्क्रिप्शन दर्शाते हैं, वेबसाइट की विश्वसनीयता नहीं। किसी भी पेमेंट की जानकारी डालने से पहले, सीधे आधिकारिक ऐप या वेबसाइट का एड्रेस मैन्युअली टाइप करना ही समझदारी है।
इमरजेंसी में क्या करें?
बैंक कभी भी आपसे पासवर्ड, OTP या PIN की मांग फोन पर नहीं करते। यदि आपको लगता है कि आपके खाते से कोई संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुआ है, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और अपना अकाउंट या कार्ड Freeze करवाएं। किसी भी अनहोनी की स्थिति में तुरंत 1930 डायल कर नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करें। सही समय पर दी गई रिपोर्ट आपके पैसों को डूबने से बचा सकती है।
