Estate Planning: क्या सभी खातों में एक ही नॉमिनी बनाना है गलती? जानें बड़े जोखिम

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AuthorNeha Patil|Published at:
Estate Planning: क्या सभी खातों में एक ही नॉमिनी बनाना है गलती? जानें बड़े जोखिम

बैंक, डीमैट और म्यूचुअल फंड में एक ही व्यक्ति को नॉमिनी बनाना आसान लगता है, लेकिन यह आपके परिवार के लिए कानूनी विवाद की वजह बन सकता है। याद रखें, नॉमिनी केवल एसेट का कस्टोडियन है, कानूनी वारिस नहीं।

बहुत से निवेशक बैंक, डीमैट या म्यूचुअल फंड अकाउंट खोलते समय सबसे आसान रास्ता अपनाते हैं—हर जगह एक ही नॉमिनी का नाम दर्ज कर देना। यह अकाउंट खोलने की प्रक्रिया में समय तो बचा लेता है, लेकिन बाद में परिवार के लिए एक गलतफहमी पैदा करता है। अगर अकाउंट होल्डर की मृत्यु हो जाए, तो यह 'यूनिफॉर्म नॉमिनेशन' की रणनीति परिवार के लिए बड़ी सिरदर्दी बन सकती है।

नॉमिनी बनाम लीगल वारिस: फर्क समझें

निवेशकों को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि 'नॉमिनी' और 'लीगल वारिस' (Legal Heir) में जमीन-आसमान का अंतर है। SEBI के नियमों के मुताबिक, नॉमिनी केवल एक ट्रस्टी या कस्टोडियन होता है, जिसे एसेट्स को रिसीव करने का अधिकार होता है। उसकी जिम्मेदारी केवल फंड्स को होल्ड करना और उन्हें कानूनी वारिसों तक पहुंचाना है, जैसा कि कानून या 'Will' (वसीयत) में लिखा हो।

नॉमिनेशन का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वह व्यक्ति एसेट्स का मालिक बन गया। अगर आपने किसी को नॉमिनी बनाया है, लेकिन आपकी वसीयत कुछ और कहती है, तो 'Will' को ही प्राथमिकता दी जाएगी। जब नॉमिनेशन और वसीयत के निर्देश आपस में टकराते हैं, तो यह कानूनी विवाद और संपत्ति ट्रांसफर में देरी की मुख्य वजह बनते हैं।

स्टैंडर्डाइज्ड नॉमिनेशन के जोखिम

इस्टेट प्लानिंग में 'एक जैसा रवैया' (Uniformity) खतरनाक हो सकता है। अलग-अलग एसेट्स का उद्देश्य अलग होता है। उदाहरण के तौर पर, बैंक अकाउंट घर के रोजमर्रा के खर्चों के लिए हो सकता है, जबकि लंबी अवधि के निवेश या इंश्योरेंस पॉलिसी किसी विशेष लक्ष्य, जैसे बच्चों की पढ़ाई के लिए बनाए गए हो सकते हैं।

यदि आप हर जगह एक ही नॉमिनी रखते हैं, तो अनजाने में आप अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों को ही ओवरराइड कर देते हैं। अगर डिफॉल्ट नॉमिनी वह व्यक्ति नहीं है जो वास्तव में उन पैसों का हकदार था, तो असली वारिसों को अपना हिस्सा पाने के लिए लंबी और महंगी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके अलावा, सालों पहले बनाए गए नॉमिनेशन पुराने पड़ जाते हैं। 25 की उम्र में बनाया गया नॉमिनी शायद 45 की उम्र में उस एसेट को संभालने के लिए सही व्यक्ति न हो।

सुरक्षित प्लानिंग के लिए क्या करें?

नॉमिनेशन को एक बार की प्रशासनिक औपचारिकता न समझें, इसे अपने फाइनेंशियल प्लान का हिस्सा बनाएं। अपने सभी खातों और उनके नॉमिनी का एक सेंट्रल रिकॉर्ड रखें।

समय-समय पर इन नॉमिनेशंस का ऑडिट करना जरूरी है। जीवन में आने वाले बड़े बदलावों जैसे शादी, तलाक या किसी करीबी के निधन के बाद अपने नॉमिनेशन को जरूर चेक करें। अंत में, याद रखें कि नॉमिनेशन कभी भी 'Will' का विकल्प नहीं हो सकता। एक सही तरीके से तैयार की गई वसीयत कानूनी स्पष्टता देती है, जिससे आपके परिवार को भविष्य में किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.