Emergency Fund Guide: जानें क्या है सच और क्या है मिथक!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Emergency Fund Guide: जानें क्या है सच और क्या है मिथक!

एक इमरजेंसी फंड बनाना बेहद जरूरी है, भले ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का कोई नियम इसे अनिवार्य न करे। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि आपकी आय की स्थिरता के आधार पर, अपनी जरूरी खर्चों के लिए 3 से 12 महीने का फंड रखना चाहिए। जानें कौन से खर्च इमरजेंसी माने जाते हैं और इसे कहां सुरक्षित रखना चाहिए।

इमरजेंसी फंड: आपकी सुरक्षा का कवच

एक इमरजेंसी फंड अचानक आने वाली मुश्किलों जैसे नौकरी छूटना, मेडिकल इमरजेंसी या कोई बड़ी मरम्मत के वक्त आपकी आर्थिक ढाल का काम करता है। यह वित्तीय योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यह जानना ज़रूरी है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा इसे अनिवार्य करने का कोई आधिकारिक नियम नहीं है। असल में, 3 से 6 महीने के खर्चों का नियम एक आम वित्तीय प्लानिंग की बेस्ट प्रैक्टिस (Best Practice) है, जो आपकी लिक्विडिटी (Liquidity) यानी नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित करती है।

कितना फंड रखना चाहिए?

यह रकम आपकी आय कितनी स्थिर है और आपकी जिम्मेदारियां क्या हैं, इस पर निर्भर करती है। वित्तीय सलाहकार (Financial Advisors) एक लेयर्ड अप्रोच (Tiered Approach) का सुझाव देते हैं। जिन लोगों की नौकरी स्थिर है, उनके लिए 3 महीने का खर्च काफी हो सकता है। वहीं, आश्रितों वाले परिवारों के लिए 6 महीने का लक्ष्य रखा जाता है। जो लोग अस्थिर उद्योगों, गिग इकोनॉमी (Gig Economy) या फ्रीलांसिंग में हैं, उन्हें अपनी आय में अनिश्चितता के कारण 9 से 12 महीने के खर्चों का बफर (Buffer) रखने की सलाह दी जाती है।

किसे कहें 'इमरजेंसी'?

यह सुनिश्चित करने के लिए कि फंड वाकई में काम आए, असली इमरजेंसी और रोज़मर्रा के खर्चों में अंतर समझना ज़रूरी है। इस फंड का इस्तेमाल सिर्फ उन ज़रूरी खर्चों के लिए होना चाहिए जिन्हें टाला नहीं जा सकता। इनमें किराया, होम लोन की EMI, ज़रूरी बिजली-पानी के बिल, राशन, बीमा प्रीमियम और ज़रूरी दवाइयां शामिल हैं।

मेडिकल इमरजेंसी फंड इस्तेमाल का एक बड़ा कारण है। भले ही आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) हो, फिर भी कुछ खर्च जैसे डिडक्टिबल्स (Deductibles) या गैर-बीमाकृत इलाज के लिए अच्छी-खासी रकम चुकानी पड़ सकती है। इसी तरह, घर या गाड़ी की अर्जेंट रिपेयर, जैसे कि पानी के लीकेज को ठीक करवाना या गाड़ी का इंजन ठीक करवाना जो आपको काम पर जाने से रोकता है, ये सब इमरजेंसी की श्रेणी में आते हैं। ऐसे मामलों में, खर्च की ज़रूरत और तुरंत भुगतान की बाध्यता इसे इमरजेंसी बनाती है।

कहां रखें इमरजेंसी फंड?

इमरजेंसी फंड का मुख्य मकसद है - तुरंत एक्सेस (Immediate Access)। इसलिए, इन पैसों को ऐसी जगहों पर रखना चाहिए जहां से वे आसानी से और बिना किसी बड़े नुकसान के निकाले जा सकें। आम तौर पर सेविंग्स अकाउंट (Savings Account) या लिक्विड म्यूचुअल फंड (Liquid Mutual Funds) को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि इनसे तुरंत पैसे निकाले जा सकते हैं और कोई बड़ा मार्केट रिस्क (Market Risk) भी नहीं होता।

लंबी अवधि के फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposits) या रियल एस्टेट (Real Estate) जैसी जगहों पर पैसा फंसाना एक लिक्विडिटी ट्रैप (Liquidity Trap) बन सकता है, जहां ज़रूरत पड़ने पर पैसा निकालना मुश्किल हो जाता है। इसी तरह, इमरजेंसी फंड को इक्विटी (Equities) या किसी भी वोलेटाइल (Volatile) इंस्ट्रूमेंट में लगाना ठीक नहीं है, क्योंकि बाज़ार में गिरावट आने पर ऐन मौके पर आपके फंड की वैल्यू कम हो सकती है।

रिस्क और महंगाई का गणित

इमरजेंसी फंड मैनेज करते समय इन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है। जहां सेफ्टी और लिक्विडिटी सबसे अहम हैं, वहीं कम ब्याज वाले खातों में सारा पैसा रखने से महंगाई (Inflation) का रिस्क बढ़ जाता है, जिससे समय के साथ पैसे की रियल वैल्यू (Real Value) कम हो सकती है। इसके अलावा, बहुत ज़्यादा सुरक्षित इंस्ट्रूमेंट्स में पैसा लगाने से अपॉर्चुनिटी कॉस्ट (Opportunity Cost) भी आती है, क्योंकि ये पैसा कहीं और ज़्यादा रिटर्न (Return) देने वाली जगहों पर लगाया जा सकता था।

सही बैलेंस बनाना ज़रूरी है - यानी इतनी लिक्विडिटी रखना कि तुरंत ज़रूरतें पूरी हो जाएं, और साथ ही कुछ पैसा थोड़े ज़्यादा रिटर्न वाले, लेकिन तुरंत उपलब्ध हो सकने वाले शॉर्ट-टर्म इंस्ट्रूमेंट्स (Short-term Instruments) में लगाया जा सके। यह अनुभवी लोगों की एक आम रणनीति है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस फंड को छुट्टियों, नए गैजेट्स या त्यौहारों जैसी गैर-ज़रूरी चीज़ों पर खर्च न किया जाए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.