Education Loan vs SIP: बच्चों की पढ़ाई के लिए निवेश तोड़ना है महंगा? जानें क्या है बेहतर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Education Loan vs SIP: बच्चों की पढ़ाई के लिए निवेश तोड़ना है महंगा? जानें क्या है बेहतर

बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए सेविंग्स (Savings) तोड़ना या एजुकेशन लोन (Education Loan) लेना, यह एक बड़ा सवाल है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि SIP से पैसे निकालना, लोन लेने से तीन गुना महंगा पड़ सकता है? सेक्शन 80E के तहत टैक्स बेनिफिट्स (Tax Benefits) को समझना आपकी लॉन्ग-टर्म वेल्थ (Long-term Wealth) को सुरक्षित रख सकता है।

Detailed Coverage

आजकल कई भारतीय परिवारों के सामने एक मुश्किल सवाल खड़ा होता है कि बच्चों की हायर एजुकेशन (Higher Education) के लिए अपनी मेहनत की कमाई का इस्तेमाल करें या फिर लोन (Loan) लें। म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में किए गए निवेश को भुनाना शायद आसान लगे, लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स (Financial Experts) का मानना है कि यह कंपाउंडिंग (Compounding) की पावर को खत्म कर सकता है।

जब आप किसी इक्विटी पोर्टफोलियो (Equity Portfolio) से समय से पहले पैसा निकालते हैं, तो आप उस ग्रोथ (Growth) को खो देते हैं जो इनवेस्टमेंट सालों तक पैदा कर सकता था। यह लंबे समय में लोन के ब्याज (Interest) का भुगतान करने से कहीं ज्यादा महंगा साबित हो सकता है।

लोन पर टैक्स छूट का फायदा

एजुकेशन फाइनेंसिंग (Education Financing) का एक अहम पहलू लोन पर मिलने वाली टैक्स छूट है। इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) के सेक्शन 80E के तहत, आप एजुकेशन लोन पर चुकाए गए पूरे इंटरेस्ट अमाउंट पर डिडक्शन (Deduction) क्लेम कर सकते हैं। यह होम लोन (Home Loan) जैसे दूसरे कर्जों से बिल्कुल अलग है, जहां डिडक्शन पर लिमिट होती है।

अगर कोई परिवार हाई टैक्स ब्रैकेट (Tax Bracket) में है, तो यह डिडक्शन लोन लेने की लागत को काफी कम कर देता है। मान लीजिए, अगर कोई परिवार 12% ब्याज दर पर लोन लेता है, तो टैक्स सेविंग (Tax Saving) से असल बोझ काफी कम हो जाता है। इससे यह अच्छी परफॉर्मेंस वाली इन्वेस्टमेंट स्कीम (Investment Scheme) को तोड़ने की बजाय एक बेहतर विकल्प बन जाता है।

फाइनेंशियल फ्यूचर को कैसे बचाएं?

बच्चों की पढ़ाई के खर्च को एक सीधी लागत के बजाय, एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि इसे छात्र की भविष्य की कमाई की क्षमता के नज़रिए से देखा जाए। लोन लेकर, पेरेंट्स (Parents) अपने मौजूदा SIPs को बढ़ते रहने दे सकते हैं। इसमें मुख्य बात यह है कि लोन को समझदारी से मैनेज किया जाए।

उदाहरण के लिए, पेरेंट्स छात्र की पढ़ाई के दौरान, जिसे अक्सर मोरेटोरियम पीरियड (Moratorium Period) कहा जाता है, केवल इंटरेस्ट पोर्शन का भुगतान करना चुन सकते हैं। यह स्ट्रेटेजी (Strategy) मासिक बोझ को प्रबंधनीय रखती है और मुख्य इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखती है।

फाइनल लोन अमाउंट तय करने से पहले, कोर्स की कुल लागत की गणना करना और ग्रेजुएशन के बाद छात्र की अपेक्षित सैलरी (Salary) से इसकी तुलना करना बहुत ज़रूरी है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि लिया गया कर्ज टिकाऊ है।

एजुकेशन लोन को सिर्फ एक लायबिलिटी (Liability) के बजाय फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) के एक टूल के रूप में ट्रीट करके, परिवार वर्तमान शैक्षिक ज़रूरतों और लॉन्ग-टर्म रिटायरमेंट सिक्योरिटी (Retirement Security) के बीच के अंतर को पाट सकते हैं। इस स्थिति में किसी भी माता-पिता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातें लेंडर्स (Lenders) द्वारा दी जाने वाली ब्याज दरें, उनका अपना वर्तमान टैक्स स्लैब (Tax Slab) और उनके लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स (Financial Goals) की अनुमानित समय-सीमा हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.