स्थिरता की ओर EPFO का झुकाव: 8.25% पर PF ब्याज दर बरकरार
EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ (CBT) ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए प्रॉविडेंट फंड (PF) पर 8.25% की ब्याज दर को बनाए रखने का फैसला किया है। यह निर्णय वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रहा है, लेकिन यह साफ संकेत देता है कि संगठन मौजूदा आर्थिक माहौल में ऊंचे रिटर्न की दौड़ से ज्यादा सदस्यों की पूंजी सुरक्षा और उन्हें मिलने वाली रिटर्न की स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है। यह लगातार तीसरा साल है जब PF पर ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
क्यों 8.25% पर टिकी दर?
EPFO का यह कदम बाजार की बढ़ती अनिश्चितताओं और वैश्विक स्तर पर गिरती ब्याज दरों को देखते हुए एक सतर्क रणनीति का हिस्सा है। इस दर को बनाए रखकर, EPFO अपने करीब 31 करोड़ सदस्यों को एक भरोसेमंद और स्थिर रिटर्न देना चाहता है। तुलनात्मक रूप से देखें तो, पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) पर फिलहाल 7.1% और पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट पर 6.9% से लेकर 7.5% तक ब्याज मिल रहा है। ऐसे में, 8.25% की दर अभी भी प्रतिस्पर्धी मानी जा रही है, जो रिटायरमेंट के लिए जमा पैसे को सुरक्षित रखने में मददगार है।
निवेश पोर्टफोलियो और भविष्य की योजनाएं
दिसंबर 2025 तक EPFO के पास करीब ₹31 लाख करोड़ का एक विशाल फंड है। इस राशि का 89% से अधिक हिस्सा डेट इंस्ट्रूमेंट्स, खासकर सरकारी सिक्योरिटीज में निवेशित है। इस तरह के सुरक्षित निवेश से रिटर्न में अचानक बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद कम ही रहती है।
बाजार की उठापटक से निपटने के लिए EPFO एक 'इंटरेस्ट स्टेबलाइजेशन रिजर्व' (Interest Stabilization Reserve) बनाने की संभावना भी तलाश रहा है। इसके लिए IIM कोझिकोड से व्यवहार्यता (feasibility) का अध्ययन करने को कहा गया है। यह रिजर्व भविष्य में बाजार में आने वाली गिरावट या अस्थिरता के समय रिटर्न को स्थिर रखने में मदद करेगा। इसके अलावा, EPFO पारंपरिक एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETFs) से आगे बढ़कर सेक्टर-आधारित और फैक्टर-आधारित इंडेक्स में निवेश करके अपने निवेश पोर्टफोलियो को और बेहतर बनाने की योजना बना रहा है, ताकि रिटर्न को बढ़ाया जा सके।
दर पर मतभेद और घाटे का अनुमान
हालांकि, 8.25% की दर पर बने रहने के फैसले को लेकर कुछ चर्चाएं भी हैं। सूत्रों के मुताबिक, EPFO की अपनी निवेश उप-समिति और वित्त मंत्रालय ने दर को घटाकर 8.10% करने का सुझाव दिया था। अगर 8.25% की दर को अंतिम रूप दिया जाता है, तो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए लगभग ₹944.06 करोड़ का घाटा होने का अनुमान है। इसके विपरीत, 8.10% की दर से ₹1,675.82 करोड़ का सरप्लस (अतिरिक्त राशि) पैदा होता। यह घाटा दर्शाता है कि बिना किसी रिजर्व से राशि निकाले 8% से ऊपर का भुगतान करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।