EPS-95 स्कीम के तहत ज्यादा पेंशन पाने के लिए सदस्यों को अपने पुराने सैलरी कॉन्ट्रिब्यूशन का EPFO डेटा से मिलान करना अनिवार्य है। डेटा में अंतर होने पर क्लेम रिजेक्ट हो सकते हैं या उसमें देरी हो सकती है।
पुरानी सैलरी डिटेल्स का मिलान क्यों है जरूरी?
EPS-95 स्कीम के तहत ज्यादा पेंशन पाने की चाह रखने वाले रिटायर्ड और मौजूदा कर्मचारियों को अपने एम्प्लॉयमेंट रिकॉर्ड्स को बहुत सावधानी से मैनेज करने की जरूरत है। अगर आप 31 अगस्त 2014 या उससे पहले EPF सिस्टम का हिस्सा थे, तो आपके पास वास्तविक वेतन पर पेंशन पाने का विकल्प है। लेकिन EPFO इस क्लेम को तभी प्रोसेस कर पाएगा जब आपके दशकों पुराने कॉन्ट्रिब्यूशन डेटा का पूरी तरह से मिलान होगा।
क्यों फंस सकता है आपका क्लेम?
कई लोग यह गलती कर बैठते हैं कि केवल अपनी मौजूदा सैलरी दिखाना काफी है। जबकि हकीकत यह है कि EPFO आपके पिछले एम्प्लॉयर्स द्वारा बताए गए वेतन और PF सिस्टम में दर्ज कॉन्ट्रिब्यूशन का सटीक मिलान चाहता है। यदि आपका पुराना कॉन्ट्रिब्यूशन स्टैच्युटरी सीलिंग पर ही सीमित रखा गया था, जबकि आपकी असली सैलरी ज्यादा थी, तो आपको अपनी पात्रता साबित करने के लिए ठोस दस्तावेज देने होंगे।
खुद करें दस्तावेजों का ऑडिट
प्रोसेस को आसान बनाने के लिए आपको अपने पास मौजूद पुराने PF पासबुक्स, सैलरी स्लिप्स और Form 16 को एक साथ रखना चाहिए। यदि EPFO रिकॉर्ड में सैलरी इतिहास गलत है, तो इसे साबित करने की जिम्मेदारी कर्मचारी की ही होगी।
सरकार का नया नियम और भ्रम
हाल ही में सरकार ने EPF, EPS और EDLI के लिए अनिवार्य वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया है, जो 17 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा। ध्यान रहे कि यह नया बदलाव EPS-95 के हायर पेंशन ऑप्शन से बिल्कुल अलग है। इस नए नियम के तहत जिन कर्मचारियों की सैलरी ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है, उनका PF डिडक्शन बढ़ जाएगा, लेकिन इसका हायर पेंशन के लिए जरूरी ऐतिहासिक डेटा वेरिफिकेशन से कोई लेना-देना नहीं है।
आगे क्या करें?
अगर आप हायर पेंशन के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो रिटायर्ड होने से पहले EPFO के ऑनलाइन ग्रीवेंस पोर्टल का उपयोग करके डेटा में मौजूद कमियों को तुरंत ठीक करवाएं। केवल डिजिटल पासबुक पर भरोसा करने के बजाय फिजिकल रिकॉर्ड्स से क्रॉस-चेक करना सबसे सही तरीका है, ताकि फाइल पेंडिंग होने या रिजेक्ट होने से बचा जा सके।
