आयकर अधिनियम (Income Tax Act) के नियम 9 के अनुसार, अगर आप 5 साल की लगातार सर्विस पूरी करने से पहले EPF निकालते हैं, तो उसे एक मान्यता प्राप्त प्रोविडेंट फंड (recognized provident fund) नहीं माना जाता। इसका सीधा मतलब है कि आपने EPF योगदान पर जो भी टैक्स छूट (tax benefits) Section 80C के तहत ली थी, वह वापस ले ली जाती है। यानी, यह राशि उस साल की टैक्सेबल इनकम में जोड़ दी जाती है, जिससे आपकी टैक्स देनदारी अचानक बढ़ जाती है।
यहां एक और बड़ी मुश्किल TDS (Tax Deducted at Source) को लेकर है। अगर आप 5 साल से पहले ₹50,000 से ज़्यादा की EPF राशि निकालते हैं और PAN देते हैं, तो 10% TDS कटता है। उदाहरण के तौर पर, अगर आप ₹5 लाख निकालते हैं, तो ₹50,000 TDS के तौर पर कट सकते हैं। लेकिन यह सिर्फ एक एडवांस पेमेंट है। आपकी असली टैक्स देनदारी कहीं ज़्यादा होती है। इसमें आपके एम्प्लॉयर का योगदान, दोनों के योगदान पर मिला ब्याज (जो 'Income from Other Sources' के तहत टैक्सेबल है), और Section 80C के तहत वापस ली गई छूट शामिल होती है। एक अनुमान के मुताबिक, तीन साल बाद ₹5 लाख निकालने पर लगभग ₹1.56 लाख का अतिरिक्त टैक्स लग सकता है, जिसमें से ₹1.06 लाख आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय चुकाना पड़ सकता है।
इन सब झंझटों और भारी टैक्स से बचने का सबसे अच्छा तरीका है EPF ट्रांसफर। जब भी आप नौकरी बदलें, तो अपने पुराने EPF खाते का बैलेंस नए एम्प्लॉयर के खाते में ट्रांसफर करवा लें। इसके लिए Form 13 का इस्तेमाल किया जाता है और यह प्रक्रिया Unified Member Portal के ज़रिए आसानी से हो सकती है। सबसे बड़ी बात, EPF ट्रांसफर करने से आपकी सर्विस लगातार बनी रहती है। इससे 5 साल की गिनती जारी रहती है और आप EPF निकासी पर लगने वाले भारी टैक्स से बच जाते हैं।
खासकर IT जैसे प्रोफेशनल्स के लिए, जो बार-बार नौकरी बदलते हैं, EPF से जल्दी पैसा निकालना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। लोग सुविधा देखकर पैसा निकाल लेते हैं, लेकिन Section 80C के फायदे वापस जाने और एम्प्लॉयर के कंट्रीब्यूशन व ब्याज पर लगने वाले टैक्स को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। यह अचानक आने वाली टैक्स की मांग आपको मुश्किल में डाल सकती है, और देर से भुगतान पर ब्याज और जुर्माने का खतरा भी बना रहता है।
लंबे समय की फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए, EPF को समय से पहले निकालने से बचना ही समझदारी है। अपनी सर्विस को लगातार बनाए रखना और नौकरी बदलने पर EPF ट्रांसफर करना, आपके रिटायरमेंट फंड को सुरक्षित रखने का सबसे बेहतर तरीका है।
