अगर आपने अपनी नौकरी के 5 साल पूरे होने से पहले ही कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से पैसे निकाल लिए हैं, तो जान लें कि इस पर इनकम टैक्स लग सकता है। आपको अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में इस निकासी को सही ढंग से दिखाना होगा, वरना टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस आ सकता है।
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से पैसे निकालना एक बड़ा वित्तीय फैसला होता है, लेकिन अगर आपने 5 साल की लगातार सेवा अवधि पूरी करने से पहले ही यह पैसा निकाल लिया है, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इसे अलग तरह से देखता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि EPF का पैसा टैक्स-फ्री होता है, लेकिन जल्दी निकासी पर टैक्स देनदारी बनती है, जिसे आपको इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय सही-सही बताना होगा।
जल्दी निकासी पर कैसे लगता है टैक्स?
EPF खाते के किस हिस्से से आप पैसा निकाल रहे हैं, इस पर टैक्स का तरीका निर्भर करता है। आपके एम्प्लॉयर (Employer) का EPF में योगदान और उस हिस्से पर मिला ब्याज, सैलरी इनकम माना जाता है। इसलिए, यह राशि आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होती है।
वहीं, आपकी अपनी जमा राशि पर मिले ब्याज को 'अन्य स्रोतों से आय' (Income from Other Sources) के तहत गिना जाता है और इस पर भी आपकी स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। एक और महत्वपूर्ण बात, अगर आपने अपनी जमा राशि पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट ली थी, तो निकासी के साल में यह छूट वापस ली जा सकती है, जिससे उस फाइनेंशियल ईयर के लिए आपकी कुल टैक्स देनदारी बढ़ सकती है।
डेटा मिलान क्यों है जरूरी?
भले ही आपकी निकासी से TDS (Tax Deducted at Source) कट गया हो, आपकी जिम्मेदारी यहीं खत्म नहीं होती। टैक्स डिपार्टमेंट आपकी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS का इस्तेमाल करके वित्तीय लेनदेन पर नजर रखता है।
अगर आपके ITR में दर्ज आंकड़े टैक्स अथॉरिटीज के पास मौजूद डेटा से मेल नहीं खाते हैं, तो आपको स्पष्टीकरण मांगने या अतिरिक्त सबूत पेश करने के लिए ऑटोमेटेड नोटिस आने की संभावना बढ़ जाती है। इस जोखिम को कम करने के लिए, टैक्सपेयर्स को अपना लेटेस्ट EPF पासबुक डाउनलोड करना चाहिए और टैक्स रिटर्न फाइनल करने से पहले AIS और फॉर्म 26AS में दिख रही एंट्रीज से हर आंकड़े का मिलान करना चाहिए।
आम रिपोर्टिंग गलतियों से बचें
एक आम गलती जो टैक्सपेयर्स करते हैं, वह है पूरी निकासी राशि को एक ही इनकम हेड के तहत दिखाना। अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, एम्प्लॉयर के योगदान का टैक्सेबल हिस्सा और उस पर मिला ब्याज 'सैलरी से आय' (Income from Salary) के तहत दिखाना चाहिए। जबकि, आपकी निजी जमा पर मिले ब्याज को 'अन्य स्रोतों से आय' (Income from Other Sources) के तहत दिखाना चाहिए।
फाइलिंग प्रक्रिया शुरू करने से पहले अपना फॉर्म 16, EPF पासबुक और निकासी का प्रमाण व्यवस्थित रखना, गलतियों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि आपको सटीक टैक्सेबल राशि के बारे में कोई संदेह है, तो अपने एम्प्लॉयर द्वारा प्रदान किए गए टैक्स स्टेटमेंट या EPFO पोर्टल पर उपलब्ध विवरण देखें, ताकि आपका ITR फाइलिंग सटीक और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुरूप हो।
