अगर आप नौकरी बदलने की सोच रहे हैं, तो 29 जून 2026 से लागू नई EPF Scheme के नियमों को समझना बेहद जरूरी है। इसमें विड्रॉल लिमिट से लेकर नॉमिनेशन तक के नियम बदल गए हैं, जिनका पालन करना आपकी सेविंग्स के लिए अनिवार्य है।
29 जून 2026 से प्रभावी हुई नई EPF स्कीम के तहत, रिटायरमेंट फंड के नियमों में काफी बदलाव किए गए हैं। EPFO का मुख्य उद्देश्य लंबी अवधि की सुरक्षा देना है, लेकिन नए फ्रेमवर्क में विड्रॉल (Withdrawal) और डॉक्यूमेंटेशन की शर्तों को काफी स्पष्ट कर दिया गया है।
विड्रॉल और नॉमिनेशन के नए नियम
नई स्कीम के मुताबिक, बेरोजगारी की स्थिति में आप अपने कुल PF कॉर्पस का 75% हिस्सा तुरंत निकाल सकते हैं। बाकी बचा 25% हिस्सा आपको लगातार 12 महीने की बेरोजगारी के बाद ही मिल सकेगा। इसके अलावा, पुराने नॉमिनेशन अब मान्य नहीं होंगे, इसलिए सभी मेंबर्स को अपने पोर्टल पर जाकर नए सिरे से नॉमिनेशन अपडेट करना होगा।
UAN और ट्रांसफर का प्रबंधन
नौकरी बदलते समय नया UAN बनाने की गलती बिल्कुल न करें। अपना पुराना UAN ही इस्तेमाल करें ताकि आपकी पूरी सर्विस हिस्ट्री एक जगह रहे। याद रखें, फंड का ट्रांसफर अपने आप नहीं होता, आपको नई कंपनी ज्वाइन करने के बाद ऑनलाइन ट्रांसफर रिक्वेस्ट डालनी होगी।
जरूरी डॉक्यूमेंट्स और KYC
ऑनलाइन क्लेम रिजेक्ट होने का मुख्य कारण गलत 'Date of Exit' है। पिछली कंपनी से यह तारीख सही से अपडेट करवाना सुनिश्चित करें। साथ ही, आपका आधार (Aadhaar), पैन (PAN) और बैंक डिटेल्स EPFO रिकॉर्ड्स और पेरोल डेटा में बिल्कुल मैच होनी चाहिए।
लंबी अवधि का निवेश और इक्विटी
PF महज एक सेविंग्स फंड नहीं है, यह एक लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएटर है। EPFO अपने कॉर्पस का 15% हिस्सा इक्विटी मार्केट में (ETF के जरिए, जैसे Nifty 50 और BSE Sensex) निवेश करता है। बार-बार पैसा निकालने से कंपाउंडिंग का फायदा खत्म हो जाता है, इसलिए अपने खाते को कंसोलिडेट रखें और नियमित रूप से अपनी पासबुक चेक करते रहें।
