नौकरी छोड़ने या ब्रेक लेने पर EPF पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आ सकता है। जब कंट्रीब्यूशन रुक जाता है, तो उस दौरान मिलने वाला ब्याज 'Income from Other Sources' माना जाता है।
ब्याज पर टैक्स कब लगता है?
ज्यादातर लोग EPF को एक सुरक्षित टैक्स-फ्री निवेश मानते हैं, लेकिन नियम तब बदल जाते हैं जब आप काम से ब्रेक लेते हैं। जैसे ही EPF अकाउंट में रेगुलर कंट्रीब्यूशन बंद होता है, उस दौरान मिलने वाला ब्याज 'Tax-Exempt' नहीं रह जाता। इसे 'Income from Other Sources' के तहत टैक्स योग्य माना जाता है। यह स्थिति तब तक बनी रहती है जब तक आप दोबारा नौकरी शुरू करके कंट्रीब्यूशन जमा करना शुरू नहीं करते।
इनऑपरेटिव (Inoperative) अकाउंट का फर्क
टैक्सेबल अकाउंट और इनऑपरेटिव अकाउंट के बीच अंतर समझना जरूरी है। एक अकाउंट तब इनऑपरेटिव हो जाता है जब उस पर ब्याज मिलना पूरी तरह बंद हो जाए। 55 साल या उसके बाद रिटायर होने वालों के लिए, रिटायरमेंट की तारीख के 36 महीने बाद तक ब्याज मिलता है। वहीं, 55 साल से पहले रिटायर होने वालों को 58 साल की उम्र तक ब्याज मिलता रहता है। इसके बाद अकाउंट डॉर्मंट हो जाता है और ब्याज मिलना रुक जाता है।
टैक्स फाइलिंग और तरीके
इस ब्याज को रिपोर्ट करने के दो तरीके हैं: 'Accrual Basis' और 'Receipt Basis'।
- Receipt Basis: इसमें आप विथड्रॉल के समय ब्याज दिखाते हैं। लेकिन ध्यान रहे, इकट्ठा ब्याज आपको उच्च टैक्स स्लैब में डाल सकता है।
- Accrual Basis: इसमें आप हर साल होने वाली कमाई को दिखाते हैं, जिससे टैक्स का बोझ बंट जाता है।
अगर आपने पिछले सालों में इसे रिपोर्ट नहीं किया है, तो आप 'Updated ITR' फाइल करके अपनी गलती सुधार सकते हैं। अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की सलाह लेकर अपनी स्थिति के अनुसार सही विकल्प चुनें ताकि आप भारी टैक्स देनदारी से बच सकें।
